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धौलासिद्ध प्रोजेक्ट: सुक्खू सरकार कोर्ट में दाखिल करेगी शपथ पत्र

धौलासिद्ध प्रोजेक्ट पर हिमाचल की सुक्खू सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 66 मेगावाट की इस परियोजना को सरकार ने अपने अधीन लेने की तैयारी कर ली है।

शिमला में अधिकारियों के साथ बैठक करते सीएम सुक्खू, Photo Credit-DPR Shimla

शिमला में अधिकारियों के साथ बैठक करते सीएम सुक्खू, Photo Credit-DPR Shimla

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने ब्यास नदी पर निर्माणाधीन 66 मेगावाट धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना को अपने अधीन लेने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बहुउद्देशीय परियोजनाएं एवं ऊर्जा विभाग को परियोजना के अधिग्रहण के संबंध में न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने बुधवार देर शाम शिमला में बहुउद्देशीय परियोजनाएं एवं ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश हित में धौलासिद्ध परियोजना की लागत की पहली किस्त का भुगतान करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और राज्य की संपदा व प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार एसजेवीएनएल से लुहरी और सुन्नी जलविद्युत परियोजनाओं को भी अपने अधीन लेने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने निर्माणाधीन विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने और निर्धारित समय सीमा में परियोजनाएं पूरी करने के निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 450 मेगावाट क्षमता की शोंगटोंग जलविद्युत परियोजना अगले वर्ष सितंबर तक तीन टरबाइनों की कमीशनिंग के बाद पूरी तरह कार्यशील हो जाएगी। परियोजना से उत्पादित बिजली की खरीद के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के साथ विद्युत खरीद समझौता (पीपीए) किया जाएगा।

पूह-समदो-काजा ट्रांसमिशन लाइन पर भी फोकस

मुख्यमंत्री ने पूह से समदो और समदो से काजा तक 66 केवी ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जा सके। बैठक में रंगरिक की 2 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। परियोजना में 1 मेगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री ने इसे बर्फबारी शुरू होने से पहले चालू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सर्दियों में भी परियोजना सुचारू रूप से चलती रहे, जिससे क्षेत्र के लोगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सके।

 

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, एचपीएसईबीएल के अध्यक्ष प्रबोध सक्सेना, अतिरिक्त मुख्य सचिव (विद्युत) आर.डी. नजीम, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, एचपीएसईबीएल के प्रबंध निदेशक आदित्य नेगी, हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक, निदेशक ऊर्जा शुभ करण सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। 

 

यह भी पढ़ें: हिमाचल के स्कूलों में नहीं होंगे निजी कार्यक्रम, समझिए क्यों लगाई जा रही रोक?

एक नजर में धौलासिद्ध परियोजना


परियोजना: धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना
क्षमता: 66 मेगावाट
नदी: ब्यास
निर्माण एजेंसी: सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल)
सरकार का कदम: परियोजना को प्रदेश सरकार के अधीन लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश
न्यायालय: अधिग्रहण के संबंध में शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश
सरकार का रुख: परियोजना की लागत की पहली किस्त का भुगतान करने को तैयार

ऊर्जा क्षेत्र की इन परियोजनाओं पर भी फोकस

450 MW शोंगटोंग: तीन टरबाइनों की कमीशनिंग के बाद सितंबर 2027 तक पूरी तरह कार्यशील करने का लक्ष्य।
लुहरी और सुन्नी: एसजेवीएनएल से दोनों परियोजनाओं को प्रदेश सरकार के अधीन लेने के लिए प्रयास जारी।
पूह-समदो-काजा: 66 केवी ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश।


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