logo

ट्रेंडिंग:

डॉल्फिन को बचाने की बिहार में मुहिम, गांव वालों की मदद से होगी सुरक्षा 

बिहार के भागलपुर में शिव कॉरिडोर की भी स्थापना की जा रही है। पहले ग्रामीण इसका शिकार भी करते थे, लेकिन अब इस पर रोक लगा दी गई है।

news image

डॉल्फिन का प्रतीकात्मक चित्र । Photo Credit: AI Generated

शेयर करें

संबंधित खबरें

Reporter

संजय सिंह, पटना। बिहार के भागलपुर में सुल्तानगंज से लेकर कहलगांव के बीच सात किलोमीटर क्षेत्र में डॉल्फिन अभ्यारण फैला हुआ है। इसकी स्थापना 1991 ई में की गयी थी। इस अभ्यारण को देखने के लिए देश विदेश के सैलानी यहां आते रहते है। सुल्तानगंज में सूबे के पहले शिव कॉरिडोर की भी स्थापना होनी है। पर्यावरण के दृष्टिकोण से डॉल्फिन का गंगा में पाया जाना महत्वपूर्ण माना जाता है। 

 

कलकत्ता से बनारस के बीच  क्रूज सेवा का संचालन विदेशी सैलानियों के लिए किया गया था। यह क्रूज डॉल्फिन अभ्यारण क्षेत्र से ही गुजरता है। अज्ञानतावश गंगा तट पर बसे ग्रामीण इसका शिकार भी करते है। डॉलफिन देश के 8 राज्यों की नदियों में पाए जाते है। केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में ग्रामीणों के साथ मिल कर इसके गणना और संरक्षण का काम शुरू कर दिया है।

 

यह भी पढ़ें: हरियाणा STF की बिहार में कार्रवाई, पूर्व BJP नेता के आवास पर छापा, ठगी का आरोप

डॉल्फिन अभ्यारण का महत्व 

यह अभ्यरण 60 किलोमीटर गंगा में फैला हुआ है। लुप्तप्राय जलजीव को बचाने के लिए 1991 में इसे संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था। इस इलाके में मछुआरों की संख्या भी अधिक है। परिणामस्वरूप मछली के शिकार के दौरान मछुआरे डॉलफिन का भी शिकार कर लेते थे। इससे इसके अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया था। ग्रामीणों के बीच यह अफवाह थी की डॉलफिन का तेल  लगाने से घुटने का दर्द समाप्त हो जाता है।

 

इस अफवाह के कारण पहले कई डॉलफिन मछलियां मार दी  गयी थीं। बाद में वन विभाग ने अभ्यारण क्षेत्र में मछली के शिकार पर पाबन्दी लगा दी। डॉलफिन की सुरक्षा के लिए जगह जगह पर गार्ड तैनात किये गए। इसके अलावा मोटर बोट से गश्ती भी की जाने लगी। अब धीरे-धीरे डॉलफिन की संख्या बढ़ने लगी है।

चार नदियों में है डॉल्फिन

बिहार के चार नदियों में क्रमशः गंगा, गंडक, महानंदा और कोसी में डॉल्फिन निवास करती है। डॉलफिन का पहला सर्वेक्षण 2023-24 में किया गया। पहले सर्वेक्षण में 2220 से अधिक गांडेय डॉलफिन मिली थी। इसकी रिपोर्ट 2025 में जारी की गयी। जारी  रिपोर्ट में भागलपुर में इसकी संख्या 200 से अधिक बताई गयी थी। वाइल्ड लाइफ इंस्टीटूट ऑफ़ इंडिया की टीम ने फिर से इसकी गणना शुरू कर दी है। 

 

टीम के सदस्यों को अनुमान है की इस  बार की गणना में इसकी संख्या 400 से ज़्यादा हो सकती है। यह कोलकाता और बनारस के बीच जलीय मार्ग भी है। परिणामस्वरूप इस क्षेत्र से मालवाहक जहाज के साथ साथ यात्री जहाज भी गुजरते रहते है। डॉलफिन को सबसे ज़्यादा खतरा यंत्र चालित नौका से होता है।

अभ्यारण के कारण पर्यटन में इजाफा

गंगा में डॉल्फिन की अटखेलियों को देखने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। विदेशी सैलानियों का यहां आना जाना लगा रहता है। सरकार ने मुंगेर से सबौर तक गंगा कॉरिडोर भी बनाने की बात कही है। विक्रमशिला का वैसे भी ऐतिहासिक महत्व है।

 

यह भी पढ़ेंः बिहार में हैं दुनिया के सबसे ज्यादा गरुड़, कोसी एरिया में होती है ब्रीडिंग

 

वन विभाग ने सैलानियों को डॉल्फिन दिखाने के लिए एक विशेष मोटरबोट की व्यवस्था भी कर रखी है। लोगों का कहना है की सुल्तानगंज में  बिहार का पहला शिव कॉरिडोर बनने का रास्ता साफ हो गया है। इससे श्रावणी  मेले का आकर्षण बढ़ेगा पर्यटन को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

Related Topic:#bihar news

और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap