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बिहार में हैं दुनिया के सबसे ज्यादा गरुड़, कोसी एरिया में होती है ब्रीडिंग

बिहार में पूर्वी हिस्से के कोसी एरिया में गांव वाले खुद ही गरुड़ पक्षी के प्रजनन के लिए वातावरण मुहैया करा रहे हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit: AI Generated

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संजय सिंह, पटना: दुनिया के विलुप्त प्राय पक्षियों में शामिल बड़े गरुड़ की संख्या पूर्व बिहार, कोसी में लगातार बढ़ रही है। इस इलाके में रहने वाले लोग गरुड़ों की सुरक्षा के लिए लगातार कोशिश करते रहते हैं। मंदार नेचर क्लब ने भी ग्रामीणों के साथ मिलकर इस इलाके में लगातार मुहिम चला रखा था। इस इलाके में कदम और सेमल के अधिक पेड़ हैं। 

 

इस पेड़ पर बड़े गरुड़ रहना ज्यादा पसंद करते हैं। आज इस पक्षी की संख्या पूरे विश्व में सबसे ज्यादा भागलपुर में ही है। इन विलुप्त होते पक्षियों के कारण इस क्षेत्र में देश विदेश के पक्षी वैज्ञानिक आते रहते हैं।

 

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क्या कहते हैं पक्षी वैज्ञानिक 

बड़े गरुड़ के संरक्षण को लेकर काम कर रहे मंदार नेचर क्लब के वरिष्ठ सदस्य डॉक्टर डीएन चौधरी का कहना है कि हाल के वर्षों में इस इलाके में बड़े गरुड़ की संख्या बढ़ी है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार कंबोडिया में 150 से लेकर 200 तक, असम में 500 से लेकर 600 तक, तो भागलपुर में इसकी संख्या 700 से 800 तक हो गई है। 

 

वर्तमान में पूरे विश्व में इस पक्षी की संख्या 1600 से 1700 तक है। धीरे धीरे इस पक्षी ने मधेपुरा, कटिहार, खगड़िया और पूर्णिया के ग्रामीण इलाकों में भी अपने आवास का विस्तार कर लिया है। यह इलाका विश्व की तीसरे और सबसे बड़े प्रजनन क्षेत्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है। 

गरुड़ों का पसंदीदा क्षेत्र 

यह इलाका बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। यहां के क्षेत्रों में जलजमाव बना रहता है। गरुड़ों और उनके बच्चों को आसानी से भोजन उपलब्ध हो जाता है। इस इलाके में ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में कदम और सेमल के पेड़ लगा रखे हैं। 

 

परिणामस्वरूप गरुड़ों को इस पेड़ो पर घोंसला बनाने में आसानी होती है। पक्षियों को किसी तरह की हानि न हो इसके लिए ग्रामीण पूरी तरह सजग रहते हैं। मंदार नेचर क्लब ने पक्षियों की सुरक्षा को लेकर इस इलाके के सैकड़ों युवाओं को प्रशिक्षण भी दिया है।

 

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बड़े गरुड़ों की संख्या में इजाफा हो सके, इसके लिए ग्रामीण भी प्रयत्नशील रहते हैं। भारत का पहला और अकेला गरुड़ रेस्क्यू और रिहैविलेशन सेंटर भागलपुर में खोला गया है। समय समय पर इस इलाके में गरुड़ के संरक्षण को लेकर अभियान भी चलाया जाता है।

 

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