पंजाब में नशे का मुद्दा एक बार फिर सियासत के केंद्र में आ गया है। अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने स्तर पर उठा रहे हैं। वहीं, आज 3 अगस्त से शुरू हुए पंजाब विधानसभा के मॉनसून सत्र में भी नशे के मुद्दे की गूंज सुनाई दे सकती है। शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस पार्टी और आम आदमी पार्टी तीनों ही दलों ने इस मुद्दे पर चुनाव लड़े और सरकारें बनाई। हालांकि, नशा आज तक खत्म नहीं हुआ। खत्म होना तो छोड़िए युवा नशे की गिरफ्त में और भी ज्यादा फंसता हुआ नजर आ रहा है।
ऐसे में अभ आगामी चुनाव से पहले एक बार फिर यह मुद्दा जोर पकड़ रहा है। इस बार मैदान में भारतीय जनता पार्टी भी है। भारतीय जनता पार्टी राज्य में नए सियासी समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी समाज के अलग-अलग हिस्सों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही पंजाब के ज्वलंत मुद्दों को जोरदार तरीके से उठा रही है। इसी कड़ी में अब राष्ट्रीय स्तर पर नशे के खिलाफ शुरू हुए अभियान का असर पंजाब में देखने को मिलेगा। बीजेपी अब इस मुद्दे को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में पेश करती नजर आ रही है।
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पीएम मोदी ने शुरू किया अभियान
पीएम मोदी ने नशे के खिलाफ एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया है। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि समाज से नशे की लत की समस्या को खत्म करने के लिए नई पीढ़ियों के कमिटमेंट ने उनके इस विश्वास को फिर से पक्का किया है कि भारत का युवा सामाजिक रूप से भी जागरूक और अपनी ड्यूटी को लेकर गंभीर है। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नशे के खिलाफ इस पहल को लॉन्च किया है। यह कैंपेन देश भर में जन भागीदारी आंदोलन के तौर पर शुरू हुआ, जिसे 'मेरा युवा भारत' के वॉलंटियर्स ने लीड किया, जिसका मकसद देश के युवाओं को नशे की लत के खिलाफ एक साथ मिलकर कोशिश करने के लिए एकजुट करना था
पंजाब में बढ़ता जा रहा नशा
पंजाब उन राज्यों में से है जिनमें नशे के कारण सबसे ज्यादा युवा अपनी जिंदगी खराब कर रहे हैं। नशा पंजाब में एक विशाल समस्या बनकर उभरा है। यह समस्या कितनी बड़ी है इसका अंदाजा लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ो से लगाया जा सकता है। हरसिमरत कौर के सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय ने बताया था कि जुलाई 2025 से सितंबर 2025 के बीच पंजाब में कुल 2025 ड्रग्स से जुड़े मामले सामने आए थे। इनमें कुल 9,494 किलो ड्रग्स बरामद की गई, कुल 8,507 केस रजिस्टर किए गए और 11,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
सभी सरकारें हुई फेल
पंजाब में पिछले कुछ चुनावों में हर एक राजनीतिक दल ने नशे को खत्म करने का वादा किया था। हालांकि, कोई भी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाया है। आम आदमी पार्टी सरकार का कहना है कि उसने नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया है। राज्य सरकार पहले भी 'युद्ध नशों के विरुद्ध' अभियान शुरू कर चुकी है और दावा करती रही है कि हजारों नशा पीड़ितों को इलाज से जोड़ा गया है तथा ड्रग तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहले राज्य को नशामुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान और सख्त कार्रवाई की घोषणा भी की थी। हालांकि, अभी भी इसका असर ग्राउंड पर दिखाई नहीं दे रहा है।
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क्या बीजेपी को मिल गया मुद्दा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में नशे का मुद्दा नया नहीं है। यह पिछले कई विधानसभा चुनावों में भी प्रमुख चुनावी मुद्दा रहा है। अब 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी इसे फिर से प्रमुख चुनावी एजेंडा बना रही है। पार्टी संगठन में बदलाव, नए नेताओं को शामिल करने और जमीनी स्तर पर अभियान तेज करने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था और नशे के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर नशे के खिलाफ अभियान शुरू करने का फायदा भी पंजाब में बीजेपी को मिल सकता है। बीजेपी पंजाब में लगातार इस मुद्दे को उठा रही है।