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IAS राजीव रंजन के ठिकानों पर CBI ने की छापेमारी, जानिए क्या हैं आरोप

गन लाइसेंस घोटाले के बाद एक बार फिर से IAS राजीव रंजन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हाल ही में CBI ने राजीव रंजन के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है।

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CBI Photo Credit: PTI

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एक बार फिर से बिहार के रहने वाले IAS राजीव रंजन चर्चा में हैं। इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज(IAS) राजीव रंजन के खिलाफ आय से आधिक संपित्ति के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो(CBI) ने जम्मू, बनारस, पटना और गुरुग्राम सहित 7 अलग-अलग जगहों पर सर्च ऑपरेशन किया है। राजीव रंजन का नाम फर्जी गन लाइसेंस घोटाले से भी जुड़ा है। इस केस में CBI अपनी जांच कर रही है, आने वाले समय में और भी खुलासे हो सकते हैं। 

 

CBI ने राजीव रंजन के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। इस दौरान अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और संपत्तियों से जुड़े कागजात बरामद किए हैं। जम्मू-कश्मीर में राजीव रंजन पर फर्जी गन लाइसेंस घोटाले का आरोप है। उनके साथ इस गन लाइसेंस घोटाले में नौ और अधिकारियों का नाम शामिल है। सीबीआई को शक है कि रंजन ने अपनी आय से ज्यादा संपत्ति बनाई है इसलिए उनके कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। सीबीआई अधिकारी सबूत इकट्ठा कर रहे हैं।

 

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इससे पहले भी की गई थी कार्रवाही

IAS राजीव रंजन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। इससे पहले भी उन पर गन लाइसेंस का आरोप लगा था। यह फर्जी गन लाइसेंस घोटाला साल 2012 से 2016 के बीच हुआ था। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग जिलों में 2.74 लाख गन लाइसेंस जारी किए गए थे। सीबीआई की जांच में पता चला कि IAS और JKAS अधिकारियों ने नियमों को तोड़ा है। उन्होंने बंदूक बेचने वालों और बिचौलियों से मिलीभगत की थी। इस घोटाले में बहुत सारा पैसा इधर से उधर हुआ था। जिसको लेकर सितंबर 2022 में ED ने इस मामले में राजीव रंजन और अन्य अधिकारियों की 4.69 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी। इस संपत्ति में बैंक खाते, प्लॉट और आवास शामिल थे। जांच के दौरान यह पाया गया था कि इन अधिकारियों ने अवैध रूप से गन लाइसेंस जारी करने के बदले में धन अर्जित किया था। 

कौन हैं राजीव रंजन?

राजीव रंजन 2010 बैच के IAS अधिकारी हैं। वह AGMUT काडर के IAS अधिकारी हैं। राजीव मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। इन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। ट्रेनिंग के बाद राजीव रंजन की पहली पोस्टिंग राजस्व विभाग के डिप्टी सिक्रेटरी के रूप में हुई थी।

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