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दरभंगा: अपहरण केस में रिश्वत मांगने का ऑडियो वायरल, महिला दरोगा पर गिरी गाज

बिहार के दरभंगा में रिश्वत मांगने का ऑडियो वायरल होने के बाद एक महिला दरोगा पर विभाग ने गाज गिराई है। ऑडियो में अपहरण के आरोपियों से पैसे की मांग की जा रही है। यहां तक की बीएनएस की धारा को भी प्रभावित करने का उल्लेख है।

Bihar News

प्रतीकात्मक फोटो। (AI Generated Image)

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बिहार के दरभंगा में नाबालिग लड़की के अपहरण मामले की जांच के बीच पुलिस विभाग में रिश्वतखोरी का बड़ा खेल उजागर हुआ है। आरोपी पक्ष से कथित पैसों के लेनदेन का ऑडियो वायरल होने के बाद सिमरी थाना में तैनात महिला अवर निरीक्षक ज्योति कुमारी को एसएसपी जगुनाथ रेड्डी ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

ऑडियो में पैसे के लेनदेन की चर्चा

मामला सिमरी थाना कांड संख्या 98/26 से जुड़ा है। इसमें एक नाबालिग लड़की के अपहरण को लेकर पीड़िता की मां ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। केस में मो. परवेज, इमरान, समीउल्लाह और महफूज समेत कई लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लड़की को दरभंगा जंक्शन से एक युवक के साथ बरामद किया था। बाद में न्यायालय के आदेश पर लड़की को उसके परिजनों को सौंप दिया गया।

 

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इसी केस की जांच के दौरान एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। ऑडियो में महिला दरोगा और आरोपी पक्ष के बीच पैसों के लेनदेन की चर्चा सुनाई दे रही है। बातचीत में बीएनएस की धारा 183 को प्रभावित करने और आरोपी को राहत दिलाने के बदले रुपये मांगने की बात कही जा रही है। ऑडियो में यह संवाद भी सामने आया कि जितना तय हुआ था, उतना पैसा नहीं मिला।

डीएससी करेंगे पूरे मामले की जांच 

वायरल ऑडियो सामने आते ही मामला एसएसपी जगुनाथ रेड्डी के संज्ञान में पहुंचा। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच सदर डीएसपी-2 शुभेन्द्र कुमार सुमन को सौंपी। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद महिला दारोगा ज्योति कुमारी को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र (दरभंगा) निर्धारित किया गया है। हालांकि, विभागीय जांच अभी जारी है और वायरल ऑडियो की तकनीकी जांच भी कराई जा रही है।

 

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गौरतलब है कि सिमरी थाना में पिछले दो महीनों के भीतर यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले मार्च 2026 में पीटीसी-1454 जफर इकबाल को भी वादी पर दबाव बनाने और रुपये मांगने के आरोप में निलंबित किया गया था। लगातार सामने आ रहे मामलों ने थाना की कार्यशैली और पुलिसिया पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठा दिया है। 

 

इस कार्रवाई के बाद पुलिस मुख्यालय ने साफ संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार और केस मैनेजमेंट के खेल में शामिल किसी भी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। एसएसपी कार्यालय का कहना है कि विभाग की छवि खराब करने वाले कर्मियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।


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