उत्तर प्रदेश सरकार की वृद्धावस्था पेंशन योजना बुजुर्गों के लिए आर्थिक सहारे का जरिया है लेकिन डिजिटल सत्यापन की प्रक्रिया उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है। प्रदेश में एक लाख से अधिक बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनकी पेंशन किसी न किसी तकनीकी समस्या के चलते अटकी हुई है। सबसे बड़ी दिक्कत बैंक में अंगुलियों के निशान नहीं मिलने की है। उम्र बढ़ने के साथ कई बुजुर्गों के अंगुलियों के निशान स्पष्ट नहीं आते, जिससे बायोमीट्रिक सत्यापन पूरा नहीं हो पाता।
सरकार 60 वर्ष से अधिक उम्र के गरीब बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत एक हजार रुपये प्रतिमाह देती है। वर्ष में चार किस्तों में कुल 12 हजार रुपये की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। इसके लिए आधार से बैंक खाता जुड़ा होना और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।विभाग की ओर से हर साल जून से जुलाई तक पेंशन लाभार्थियों का सत्यापन कराया जाता है। इसके बाद अगस्त में पेंशन जारी की जाती है। सत्यापन या अन्य प्रक्रिया में देरी होने पर पेंशन अगले महीने जारी होने की बात कही गई है।हालांकि, जिन बुजुर्गों का सत्यापन तकनीकी कारणों से पूरा नहीं हो पा रहा है, उन्हें भुगतान के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
बैंक से समाज कल्याण विभाग तक चक्कर
पेंशन नहीं आने पर बुजुर्ग बैंक पहुंचते हैं। वहां अंगुलियों के निशान लेकर सत्यापन करने का प्रयास किया जाता है। कई मामलों में मशीन अंगुलियों के निशान पहचान नहीं पाती। इसके बाद बुजुर्गों को दोबारा प्रक्रिया पूरी कराने के लिए बैंक जाना पड़ता है।बैंक की समस्या दूर नहीं होने पर वे समाज कल्याण विभाग पहुंचते हैं। इस तरह पेंशन के लिए बुजुर्गों को बार-बार बैंक और सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उम्रदराज लाभार्थियों के लिए यह प्रक्रिया काफी मुश्किल साबित हो रही है।
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एक साल से पेंशन का इंतजार
गांव नागर निवासी 68 वर्षीय हाकिम सिंह ने बताया कि उन्हें करीब एक साल से पेंशन नहीं मिली है। विभाग की ओर से बताया गया कि बैंक खाते की डीबीटी नहीं होने के कारण पेंशन नहीं आ रही है। बैंक पहुंचने पर अंगुलियों के निशान और आंखों की स्कैनिंग कराई गई, लेकिन इसके बाद भी पेंशन नहीं मिल सकी। खंदौली निवासी 66 वर्षीय रमेश चंद्र भी पेंशन के लिए परेशान हैं। उनका कहना था कि पिछले साल उन्हें केवल तीन किस्तें मिली थीं। एक किस्त नहीं मिली। इस साल भी अब तक एक भी किस्त उनके खाते में नहीं आई है।
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए पेंशन का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से सीधे बैंक खाते में किया जाता है लेकिन आधार, बैंक खाते और डीबीटी के बीच सत्यापन में गड़बड़ी होने पर भुगतान अटक जाता है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक उम्र अधिक होने के कारण कई बुजुर्गों के अंगुलियों के निशान स्पष्ट नहीं रहते। बायोमीट्रिक मशीन ऐसे निशानों को पहचान नहीं पाती। कई बैंकों में आंखों की पुतली की स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बुजुर्गों के लिए खाते का सत्यापन और डीबीटी प्रक्रिया पूरी कराना मुश्किल हो जाता है।
बिजनौर में 55 हजार लाभार्थियों की पेंशन अटकी
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कई जिलों में बड़ी संख्या में बुजुर्ग पेंशन के लिए परेशान हैं। लखनऊ में 2,000, आगरा में 10,000, बिजनौर में 55,000, फर्रुखाबाद में 2,880, अलीगढ़ में 2,500, जालौन में 2,880, महोबा में 5,000, बांदा में 1,200, हमीरपुर में 4,413 और चित्रकूट में 1,100 लाभार्थियों की पेंशन अटकी होने की जानकारी सामने आई है। आंकड़े बताते हैं कि समस्या केवल एक जिले तक सीमित नहीं है। अलग-अलग जिलों में बैंक सत्यापन, डीबीटी और तकनीकी प्रक्रिया से जुड़ी परेशानियों के कारण बुजुर्गों को पेंशन का इंतजार करना पड़ रहा है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी जागेश्वर सिंह के अनुसार, सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के चलते कुछ लाभार्थियों की पेंशन जारी नहीं हो पाई है। उनका कहना है कि विभागीय स्तर पर डीबीटी और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने की प्रक्रिया है। पेंशन नहीं आने पर लाभार्थी को संबंधित बैंक से संपर्क करने को कहा जाता है।
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बुजुर्गों के लिए आसान हो सत्यापन की व्यवस्था
वृद्धावस्था पेंशन का उद्देश्य बुजुर्गों को आर्थिक सहायता देना है। ऐसे में उम्र के कारण अंगुलियों के निशान नहीं मिलने जैसी समस्या के चलते पेंशन रुकना गंभीर परेशानी है। जरूरत है कि जिन बुजुर्गों का बायोमीट्रिक सत्यापन अंगुलियों के निशान से नहीं हो पा रहा है, उनके लिए वैकल्पिक और आसान सत्यापन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें पेंशन के लिए बार-बार बैंक और सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।