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AI से खुद को उपराष्ट्रपति के साथ दिखाने का आरोप, कैसे फंस गए रसिक महाराज?

ऋषिकेश के एम्स में उपराष्ट्रपति के साथ AI से बनी फर्जी फोटो पोस्ट करने पर स्वामी रसिक महाराज पर केस दर्ज हुआ है। उन्होंने इसे एक साजिश बताया है।

Swami Rasik Maharaj, Photo Credit: Social Media

स्वामी रसिक महाराज, Photo Credit: Social Media

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उत्तराखंड के ऋषिकेश के एम्स अस्पताल में हुए एक बड़े कार्यक्रम के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 'सनातन धर्म विकास परिषद उत्तर प्रदेश' के अध्यक्ष स्वामी रसिक महाराज पर आरोप लगा है कि उन्होंने खुद को ताकतवर दिखाने के लिए देश के उपराष्ट्रपति के साथ अपनी एक झूठी फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

 

यह पूरी घटना 23 अप्रैल 2026 की है। उस दिन ऋषिकेश एम्स में छठा दीक्षांत समारोह चल रहा था। इस कार्यक्रम में देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। पुलिस के मुताबिक, स्वामी रसिक महाराज उस दिन वहां मौजूद नहीं थे। उन्होंने लोगों के बीच अपनी धौंस जमाने और खुद को ऊंची पहुंच वाला दिखाने के लिए कंप्यूटर की AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपनी एक ऐसी झूठी तस्वीर तैयार की जिसमें वह उपराष्ट्रपति के बगल में खड़े नजर आ रहे थे और फिर उसे इंटरनेट पर वायरल कर दिया।

 

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क्या बोली पुलिस?

जब यह फोटो सोशल मीडिया पर फैली तो पुलिस को इस पर शक हुआ। एम्स चौकी प्रभारी देवेंद्र सिंह पंवार ने इस मामले की शिकायत की जिसके बाद ऋषिकेश कोतवाली में स्वामी रसिक महाराज के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। जिले के एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि शुरुआती जांच में ही यह साफ हो गया कि फोटो के साथ छेड़छाड़ की गई थी। AI के जरिए महराज को जबरदस्ती उस फोटो में डाला गया था ताकि दुनिया को लगे कि वह उपराष्ट्रपति के साथ वहां मौजूद थे।

 

जिस कार्यक्रम की यह फर्जी फोटो बनाई गई, वह बहुत बड़े स्तर पर आयोजित हुआ था। इस समारोह में उपराष्ट्रपति के अलावा उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल भी शामिल हुई थी। कार्यक्रम में संस्थान के अध्यक्ष प्रो.राजबहादुर और निदेशक प्रो. मीनू सिंह भी मौजूद थी। उस दिन पूरे 386 छात्र-छात्राओं को उनकी डिग्रियां दी गई। साथ ही 17 टॉपर छात्रों को 23 मेडल दिए गए जिसमें से 13 गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया। डिग्रियां लेने वालों में एमबीबीएस, नर्सिंग, एमडी-एमएस, एमएससी, एमपीएच और पीएचडी के छात्र शामिल थे।

 

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स्वामी रसिक महाराज ने क्या कहा?

जब इस मामले में केस दर्ज हुआ, तो स्वामी रसिक महाराज ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ एक गहरी साजिश रची जा रही है। स्वामी का आरोप है कि कुछ बुरे लोग उनकी समाज में बनी हुई इज्जत को खराब करना चाहते हैं।

 

उन्होंने यह भी साफ किया कि  वह इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे और इसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करेंगे। अब पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि यह फोटो असल में किसने बनाई और इसके पीछे किसका हाथ है।

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