दिल्ली के हौज खास इलाके के मकान नंबर R-15 में बुधवार की रात करीब 11:18 बजे एक घर में एयर कंडीशनर (AC) फटने से भीषण आग लग गई जिसके कारण 1968 बैच के पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी धनेंद्र कुमार का अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनकी उम्र 80 वर्ष थी। हादसे के समय घर के अंदर परिवार के सदस्यों और घरेलू के नौकरों को मिलाकर पूरे पांच लोग मौजूद थे।
इस घटना में धनेंद्र कुमार और उनका बेटा आग और धुएं की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए थे जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया था। सूचना मिलने पर हौज खास थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी और अभी स्थानीय पुलिस व क्राइम टीम इस मामले की जांच कर रही हैं जिसमें अभी तक किसी भी तरह की साजिश या गड़बड़ी की बात सामने नहीं आई है।
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जांच में पता चला है कि घर की पहली मंजिल पर लगे AC की इंडोर यूनिट में अचानक ब्लास्ट हुआ था जिससे आग पूरे कमरे में फैल गई। पुलिस और दमकल विभाग को रात 11:18 बजे इसकी सूचना मिली थी जिसके बाद राहत कार्य शुरू किया गया। झुलसे हुए दोनों लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया था जहां इलाज के दौरान धनेंद्र कुमार की मौत हो गई। क्राइम टीम और स्थानीय पुलिस हादसे के कारणों की पूरी तरह पड़ताल कर रही हैं।
धनेंद्र कुमार का करियर
साल 1946 में जन्मे धनेंद्र कुमार ने साल 1968 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) जॉइन की थी। वह अपने करियर में भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में सेक्रेटरी के पद पर काम कर चुके थे। इसके अलावा वह हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रधान सेक्रेटरी भी रहे थे। उन्हें हरियाणा के औद्योगिक विकास का श्रेय दिया जाता है। प्रशासनिक सेवाओं में उनके काम के लिए उन्हें 'नेशनल सिटिजन्स अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया था और उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली थी। धनेंद्र कुमार फरवरी 2009 से जून 2011 तक कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) के पहले चेयरमैन रहे। उनके कार्यकाल के दौरान ही भारत में प्रतिस्पर्धा कानून के मुख्य नियमों को पूरी तरह लागू किया गया था।
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रिटायरमेंट के बाद का काम
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने देश की 'राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा नीति' का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक विशेष कमेटी बनाई थी जिसके अध्यक्ष धनेंद्र कुमार थे। इसके साथ ही आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय द्वारा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को मिलने वाली मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए गठित की गई 'SAPREP' कमेटी के अध्यक्ष भी वही थे। सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद वह कॉम्पिटिशन एडवाइजरी सर्विसेज इंडिया एलएलपी' नाम की संस्था के संस्थापक चेयरमैन के रूप में काम कर रहे थे।