दिल्ली में मयूर विहार फेज-1 से एम्स और सराय काले खां तक सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी के लिए बारापुला फेज-3 कॉरिडोर की शुरूआत की गई थी। इसकी शुरुआत ही ट्रैफिक जाम के भारी झंझट के साथ हुई। सफर का समय घटने की उम्मीद में निकले लोगों को पहले ही दिन 3 से 4 किलोमीटर लंबे जाम का सामना करना पड़ा। भारी ट्रैफिक के कारण 15 मिनट का रास्ता तय करने में लोगों को 1 घंटे का समय लग गया।
आपको बता दें कि 26 सितंबर को ही अमित शाह ने इसका उद्घाटन किया था। इस कॉरिडोर को पूरा करने में लगभग 1,635 करोड़ रुपये की लागत आई है।
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क्यों लगा इतना लंबा जाम?
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, जाम की सबसे बड़ी वजह रास्ता संकरा होना बना। मयूर विहार से एम्स और दक्षिण दिल्ली की तरफ जाने वाले बड़ी संख्या में लोगों ने NH-24 और DND के बजाय इस नए कॉरिडोर को चुना। इसके चलते पुराने रास्तों पर तो भीड़ कम रही लेकिन नए फ्लाइओवर पर गाड़ियां रेंगती नजर आईं।
NH-24 और DND की तरफ से आने वाली 7 अलग-अलग लेन का ट्रैफिक सराय काले खां एग्जिट के पास आकर अचानक सिर्फ 3 लेन में सिमट जाता है। पहले ही दिन उम्मीद से ज्यादा लोगों के इस रूट को चुनने के कारण सड़कों पर गाड़ियों का दबाव अचानक बढ़ गया।
लोगों ने क्या बताया?
इस जाम में कई लोग फंस गए थे। इस कारण उन्हें बहुत परेशानी हुई। लोगों ने कहा कि जिस सफर के 15 मिनट में पूरा होने का दावा किया गया था उसमें उन्हें फ्लाईओवर पर ही 2 घंटे से ज्यादा समय लग गया। लोगों ने बताया कि मयूर विहार से आश्रम की ओर जाने वाले रास्ते को ट्रैफिक दबाव के चलते व्यस्त समय में कुछ देर के लिए अस्थाई रूप से बंद भी करना पड़ा था। शिकायतें मिलने के बाद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जाम वाली जगहों पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि नए ट्रैफिक पैटर्न को सामान्य होने में लगभग एक हफ्ते का समय लगेगा।
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8 साल की देरी से बना
आपको बता दें कि 2014 में मंजूर हुए इस प्रोजेक्ट का काम 2015 में शुरू हुआ था। साथ ही इसे 2017 तक पूरा होना था। जमीन अधिग्रहण, मंजूरियों और कोविड महामारी के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई। इससे इसकी लागत 1,260 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 1,635 करोड़ रुपये हो गई। यह 5 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर मयूर विहार फेज-1 को सराय काले खां से जोड़ता है और आगे एम्स और दक्षिण दिल्ली जाने का सीधा रास्ता देता है।