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लिवर की नकली दवाई बनाकर कमा रहे थे भारी मुनाफा, कंपनी की शिकायत पर 5 गिरफ्तार

लिवर की दवाई Live-52 के नाम पर नकली दवाई सप्लाई करने वाले एक गिरोह का भंड़ाफोड़ उत्तर प्रदेश पुलिस ने किया है। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

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नकली दवाएं बेचने वाला गिरोह, Photo Credit: Social Media

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उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद पुलिस ने नकली दवा सप्लाई करने वाले एक गिरोह का खुलासा किया है। गाजियाबाद पुलिस ने यह कार्रवाई हिमालयन कंपनी से उनकी मशहूर दवाई Liv.52, के कई नकली वर्जन की बिक्री की शिकायत मिलने के बाद की है। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह पांचों आरोपी लंबे समय से नकली दवाई बनाकर मार्केट में सप्लाई कर रहे थे। 

 

हिमालयन कंपनी ने 3 जनवरी को नकली दवाई मार्केट में सप्लाई किए जाने की शिकायत मुरादनगर में दर्ज करवाई थी। कंपनी ने अपनी शिकयात में कहा कि कुछ लोग लिवस से जुड़ी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली Liv.52 दवाई की नकली टैबलेट तैयार कर फर्जी दस्तावेजों और फर्जी जीएसटी नंबर के सहारे मार्केट में बेच रहे हैं। कंपनी ने पुलिस को जानकारी दी कि यह नकली दवाईयां अलग-अलग शहरों में ट्रांसपोर्ट की जा रही हैं, जिससे आम लोगों की सेहत पर असर पड़ सकता है। 

 

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पुलिस ने किया खुलासा

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कंपनी की शिकायत पर कार्रवाई की। कंपनी ने पुलिस को मुरादाबाद और अलीगढ़ में नकली दवाई सप्लाई की जानकारी दी थी। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर सप्लाई चेन को ट्रैक करना शुरू किया। पुलिस ने बताया कि हमें जांच में पता चला कि यह रैकेट बहुत तेजी से फैल रहा था। जांच कर रही टीम ने बताया कि इन नकली दवाइयों पर भारी मुनाफा कमाया जा रहा था और इन्हें हरियाणा और उत्तर प्रदेश में तैयार किया जा रहा था। 

आरोपियों ने क्या बताया?

पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने माना कि वह Liv.52 की नकली टैबलेट हरियाणा में स्थित एक कंपनी बना रही थी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि दवाईयों की पैकिंग के लिए सारा सामान उत्तर प्रदेश के मेरठ में तैयार किया जा रहा था। आरोपियों ने बताया कि नकली दवाईयों का एक डिब्बा तैयार करने में उन्हें 35 से 40 रुपये का खर्च आता था। यह डिब्बे इसके बाद मार्केट में 110 से 115 रुपये में सप्लाई किए जाते थे। 

 

 

हालांकि, असली दवाई के डिब्बे पर 280 रुपये अधिकतम प्राइज लिखा होता है। पुलिस का कहना है कि कीमतों के बीच यह भारी अंतर के कारण यह गिरोह आसानी से मार्केट में नकली दवाई सप्लाई कर देते थे। नकली दवाईयां बेचने में दुकानदार को भी ज्यादा फायदा होता था जो उन्हें असली दवाई में नहीं मिल पाता था। 

 

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जांच में जुटी पुलिस 

जांच में सामने आया है कि गिरोह अब तक अलीगढ़, मथुरा, बिजनौर, आगरा, मेरठ, शामली समेत कई अन्य जिलों में इन नकली दवाइयों को सप्लाई कर चुका है। पिछले चार महीने के दौरान यह गिरोह इन जिलों में 50 हजार से ज्यादा दवाई की गोलियां सप्लाई कर चुका है। 

 

 

पुलिस ने इस मामले में फिलहाल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही नकली दवाईयों के सैंपल लैब भेज दिए गए हैं। इसके बाद पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। डीसीपी सुरेंद्रनाथ तिवारी ने कहा कि इस मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में कोई और शामिल था या नहीं। उन्होंने कहा कि हम हर पहलु से इस मामले की जांच कर रहे हैं। 

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