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स्कूल में भूत की अफवाह! बच्चियां बीमार हुईं तो भेजना ही बंद कर दिया

कैमूर के एक सरकारी स्कूल में तीन छात्राओं के बेहोश होने के बाद भूत की अफवाह फैल गई। डॉक्टरों ने इसे कमजोरी और गर्मी की वजह बताया लेकिन डर के कारण कई परिजन ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया।

AI generated image of fainted school girl

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- ChatGPT

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बिहार के कैमूर जिले के अधौरा प्रखंड में एक सरकारी स्कूल में अचानक फैली भूत की अफवाह ने पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया। मामला उत्क्रमित मध्य विद्यालय लोहन्दी का है। यहां एक हफ्ते पहले क्लास के दौरान तीन बच्चियां अचानक बेहोश हो गईं। बस फिर क्या था, देखते ही देखते स्कूल में भूत घुसने की अफवाह जंगल में आग की तरह फैल गई। परिजन बच्चियों को आनन-फानन में घर ले गए और ओझा को बुलाकर झाड़-फूंक शुरू करवा दी। ओझा ने भी स्कूल में भूत होने का दावा कर दिया। इसके बाद गांव के कई घरों में डर का माहौल बन गया और लोगों ने बच्चों को स्कूल भेजना ही बंद कर दिया। उनका साफ कहना था कि जब तक स्कूल से भूत नहीं भागेगा, तब तक बच्चे क्लास में नहीं जाएंगे।

 

हफ्ते भर पहले की बात है। दोपहर का समय था। लोहन्दी स्कूल में बच्चे पढ़ रहे थे। तभी कक्षा में बैठी तीन बच्चियां अचानक चक्कर खाकर गिर पड़ीं। उन्हें पसीना छूट रहा था और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। शिक्षकों ने तुरंत परिजनों को सूचना दी। परिजन दौड़े-दौड़े आए और बच्चियों को घर ले गए। घर पहुंचते ही गांव में चर्चा शुरू हो गई कि स्कूल में कुछ गड़बड़ है। किसी ने कहा गर्मी लग गई होगी, तो किसी ने भूत-प्रेत की बात छेड़ दी। इसी बीच एक ओझा को बुलाया गया। ओझा ने बच्चियों को देखा और झाड़-फूंक के बाद ऐलान कर दिया कि स्कूल में भूत है। बस इसी बात ने आग में घी का काम किया। अगले दिन से गांव के अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने से मना कर दिया।

 

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समझाने के बाद भी नहीं माने परिजन

शिक्षकों ने जब देखा कि बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं तो उन्होंने परिजनों को समझाने की कोशिश की। काफी मान-मनौव्वल के बाद तीनों बच्चियों को अधौरा पीएचसी ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच की और हालत देखते हुए उन्हें भभुआ सदर अस्पताल रेफर कर दिया। सदर अस्पताल में मनोचिकित्सक डॉक्टर भावना गुप्ता ने तीनों बच्चियों का इलाज किया। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया, 'तीनों बच्चियां काफी कमजोर हैं। शरीर में खून और विटामिन की कमी है। गर्मी और उमस के कारण वे बेहोश हुई थीं।' डॉक्टरों ने दवा दी और कहा कि अब ये बच्चियां स्कूल जा सकती हैं। डॉक्टर भावना गुप्ता ने कहा, 'यह पूरी तरह अंधविश्वास है। भूत जैसी कोई बात नहीं है। बच्चियां कुपोषण और कमजोरी की शिकार हैं। दवा और पौष्टिक आहार से ये ठीक हो जाएंगी।'

 

उन्होंने कहा कि हम खुद टीम लेकर गांव जाएंगे और लोगों को जागरूक करेंगे लेकिन सवाल ये है कि आखिर बच्चियां बेहोश क्यों हुईं। इसका जवाब स्कूल की हालत में छिपा है। लोहन्दी का यह स्कूल कैमूर की पहाड़ी पर बना है। यहां आज तक बिजली नहीं पहुंची है। गर्मी के दिनों में क्लास में पंखा तक नहीं चलता। उमस और भीषण गर्मी में बच्चे पसीने से तरबतर होकर पढ़ाई करते हैं। 

 

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स्कूल में बिजली और पानी की व्यवस्था नहीं

शिक्षक जावेद अख्तर बताते हैं कि कई बार विभाग को लिखित में सूचना दी गई। कहा गया कि यहां बिजली और पंखे की व्यवस्था की जाए वरना बच्चे बीमार पड़ जाएंगे। जिला शिक्षा पदाधिकारी भी एक बार निरीक्षण के लिए आए थे लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिक्षकों का मानना है कि बिजली और हवा के अभाव में ही बच्चियां बेहोश हुई होंगी लेकिन अंधविश्वास इतना हावी हो गया कि कोई सच्चाई सुनने को तैयार नहीं है।

 

बच्चियों के परिजन मदन सिंह और सितारा देवी का कहना है कि स्कूल में आए दिन बच्चे बेहोश हो रहे हैं। ओझा से झाड़-फूंक कराई लेकिन आराम नहीं हुआ तो मजबूरी में सदर अस्पताल ले जाना पड़ा। उनका कहना है कि जब तक स्कूल में बिजली-पानी और पंखे की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक वे बच्चों को नहीं भेजेंगे। उन्हें डर है कि कहीं फिर से कोई बच्चा बेहोश न हो जाए। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों की बदहाली और ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास की जड़ें उजागर कर दी हैं। 

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