logo

ट्रेंडिंग:

क्या किसी घातक बीमारी का है संकेत, बिहार में अचानक क्यों मरने लगे कौवे?

बिहार के भागलपुर जिले में एक पेड़ के नीचे सैंकड़ों कौवे मृत पाए गए हैं। इस घटना पर वन विभाग के अधिकारी जांच कर रहे हैं।

Representative image

सांकेतिक तस्वीर. Photo Credit: SORA

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

संजय सिंह,पटना। भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल कार्यालय परिसर के पास एक पेड़ के नीचे सैकड़ों कौवे मृत पाए गए। इस घटना को लेकर आम लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। वन विभाग और पशुपालन अधिकारी कौवे की मौत के संबंध में कुछ भी स्पष्ट तौर पर कहने को तैयार नहीं है लेकिन पूरे जिले में कौवों की मौत की की चर्चा है और लोग प्रशासन से सवाल कर रहे हैं। 

 

इस मामले की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम जांच करने पहुंची। वन विभाग के अधिकारी आशुतोष राज का कहना है कि पूरे मामले की जांच चल रही है। सैम्पल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। विभाग ने 127 मृत कौवे को जब्त कर लिया है। इस घटना की चर्चा पूरे जिले में है और सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना को लेकर सवाल उठा रहे हैं। लोगों को शक है कि यह किसी वायरल बीमारी के कारण ना हुआ हो। 

 

यह भी पढ़ें-- 'कौन केस झेलेगा...', देवरिया में बुलडोजर ऐक्शन से पहले कमेटी ने खुद ढहा दी मजार

मृत मिले सैंकड़ों कौवे

नवगछिया अनुमंडल परिसर में सुबह लोग सैर करने के लिए निकले थे, इस दौरान लोगों ने देखा की एक वृक्ष के नीचे सैंकड़ों कौवे मृत पड़े हुए है। कुछ गंभीर स्थिति में नीचे गिरे हुए है। लोगों ने अलाव जला कर कौवे को राहत देने की कोशिश की पर उनकी कोशिशें नाकाम रहीं। जब लोग आग जलाकर भी कौवे को बचा ना सके तो उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी।  

 

सूचना मिलते ही विभाग की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान कुछ लोगों का कहना था कि बर्ड फ्लू के कारण कौवे की मौत हुई है। कुछ लोग भीषण ठण्ड को कौवे की मौत के लिए जिम्मेदार बता रहे थे। वन विभाग के अधिकारीयों ने घटनास्थल  पर पहुंच कर पूरे मामले को देखा परखा और इसके बाद मृत कौवे को उठा कर अपने साथ ले गए। 

 

यह भी पढ़ें-  'UP पुलिस उठा ले गई और रजाई ओढ़ाकर पीटा', बजरंग दल के कार्यकर्ता ने लगाए आरोप

क्या कहते है पक्षी विशेषज्ञ?

पक्षी विशेषज्ञ ज्ञानचंद्र ज्ञानू का कहना है कि कौवा पर्यावरण संतुलन को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ठण्ड के मौसम में कीड़े मकौड़े कम निकलते है। लोग जो कचरा फेंकते हैं वही कौवा का आहार बनता है। मौजूदा समय में यह कचरा संक्रमित हो गया है। इस कचरे को खाने से भी कौवे की मौत हो सकती है। 

 

उन्होंने कहा कि इस मौसम में पानी और भोजन का अभाव हो जाता है। इस कारण कौवे की शारारिक ऊर्जा कम जाती है। इससे भी कौवे की मौत हो सकती है। उन्होंने इस बात की भी संभावना जताई कि नवगछिया में बड़े पैमाने पर गेंहूं और मक्के की बुआई का काम चल रहा है। किसान कीटनाशक दवाओं से बीज का उपचार करते हैं। भोजन के रूप में कीटनाशक दवा के इस्तेमाल करके तैयार किए गए बीज को खाने से कौवे की मौत हो सकती है। हालांकि, अभी सिर्फ कयास ही लगाए जा सकते हैं। मौत का असली कारण तो जांच रिपोर्ट में ही सामने आएगा। 

Related Topic:#bihar news

और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap