हरियाणा के गुरुग्राम में एक ऐसे शातिर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है, जो अमीर लोगों को जाल में फंसाकर सोने के नकली सिक्के बेचता था। ये नकली सोने के सिक्के बेचकर गिरोह अमीरों से मोटी रकम वसूलता था। ठगी करने का यह पूरा सिंडिकेट अमीरों का भरोसा जीतने के बाद चलता था। यह गिरोह अन्तरराजीय है। गुरुग्राम क्राइम ब्रांच ने इससे जुड़े 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरोह अमीरों के साथ में बेहद चालाकी से ठगी करता था। वह पहले असली सोने के सिक्के दिखाकर लोगों का भरोसा जीतते, फिर नकली सोने का सिक्के बेचते और उसके बदले में मिले पैसों को लेकर फरार हो जाते। क्राइम ब्रांच ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके कब्जे से भारी मात्रा में नकदी और नकली सोना बरामद किया गया है।
गैंग कैसे करता था काम?
इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए गुरुग्राम पुलिस के डीसीपी क्राइम हितेश यादव ने बताया कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। आरोपी खुद को गरीब मजदूर बताकर लोगों के पास जाते थे और कहते थे कि खुदाई के दौरान उन्हें कुछ पुराने सिक्के मिले हैं। गिरोह के लोग सामने वाले को असली सोने-चांदी के सिक्के दिखाते और उनसे उन सिक्कों की जांच कराने को कहते।
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अमीरों का भरोसा जीतते थे
जब जांच में सोने के सिक्के असली निकलते तो शिकार को भरोसा हो जाता कि सिक्का असली है। इसमें गिरोह हमेशा अमीरों को पकड़ता था। इसके बाद आरोपी कम कीमत में ज्यादा सोना देने का लालच देते और उनसे सौदा तय कर लेते थे। मगर, गिरोह के लोग असली डील के समय असली सोने के सिक्के की जगह पीतल या तांबे पर सोने का पानी चढ़े नकली सिक्का पकड़ा देते थे।
गुरुग्राम क्राइम ब्रांच ने बताया कि गिरोह ने शहर के सुशांत लोक में रहने वाले एक व्यापारी से 2.49 करोड़ रुपये और 50 तोला सोना लिया और वहां से फरार हो गए। बाद में पता चला कि ये नकली पीतल के सिक्के थे। व्यापारी ने सुशांत लोक पुलिस स्टेशन में 1 अप्रैल को केस दर्ज करवाया। पीड़ित कारोबारी ने आरोप लगाया कि 13 फरवरी को एक अनजान आदमी उसके पास आया और सस्ते दामों पर सोने और चांदी के सिक्के बेचने का ऑफर दिया। आरोपी के दिए गए शुरुआती सिक्के असली थे, जिससे उनका भरोसा पैदा हो गया।
शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की और कई जगहों पर छापेमारी की। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की। क्राइम ब्रांच ने गिरोह के काम करने का तरीके को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके समझाया।
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खुद को बताते थे गरीब मजदूर
हितेश यादव ने कहा, 'गिरोह के लोग खुद को गरीब मजदूर बताते थे और दावा करते थे कि उन्हें खुदाई के दौरान सोने के सिक्के मिले हैं। वे खरीदने वालों से पुलिस एक्शन का डर दिखाकर कुछ सिक्कों को अपनी तरफ से जांच करवाने के लिए कहते थे। जब सिक्कों के असली होने का प्रमाण मिल जाता तो मार्केट वैल्यू से काफी कम रेट पर शिकार से डील की जाती थी। ये अक्सर 25–30 लाख प्रति किलो के हिसाब से शिकार को मुनाफे का लालच देते थे।'
क्राइम ब्रांच ने आगे बताया कहा कि शिकार का भरोसा जीतने के बाद, गिरोह बड़ी मात्रा में सोने की परत चढ़े पीतल के सिक्के बेच देते। ये गिरफ्तारी से बचने के लिए शहर छोड़ देते थे। गिरोह का मुख्य सरगना गुजरात के वडोदरा का रहने कल्पेश उर्फ रवि है।
पूछताछ के दौरान उसने बताया कि उसने इससे पहले कई हाई-प्रोफाइल लोगों को ठगा है। 15 साल पहले उसने बॉलीवुड अभिनेता आदित्य पंचोली से करीब 25 लाख रुपये ठगे थे। इसके अलावा वह अभिनेता सलमान खान के पिता सलीम खान के पीए को भी करीब 20 लाख रुपये का चूना लगा चुका है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 2.30 करोड़ कैश और 678 ग्राम सोना बरामद किया है। अधिकारी ने बताया कि गैंग के दूसरे सदस्यों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिशें जारी हैं।