logo

मूड

ट्रेंडिंग:

'गुरु साहिब कृपा करें', बीजेपी-अकाली गठबंधन को लेकर हरसिमरत कौर ने क्या कहा?

शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने एक बार फिर से बीजेपी के साथ गठबंधन के संकेत दिए हैं। उन्होंने एक रैली में दिल्ली के साथ अच्छे संबंधों की वकालत की है।

harsimrat kaur badal

हरसिमरत कौर बादल

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

पंजाब की राजनीति में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस बार चर्चा को हवा खुद अकाली दल की सांसद हरसिमरत कोर बादल ने दी है। गुरुवार को उन्होंने एक रैली में पंजाब की तरक्की के लिए दिल्ली से बेहतर संबंध की इच्छा जताई। उनके इस बयान के बाद दोनों पार्टियों के गठबंधन की अटकलों को हवा दे दी है।

 

हरसिमरत कौर बादल ने यह संकेत यहां संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की शहादत की 41वीं बरसी के मौके पर आयोजित शिअद के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने कहा, ''गुरु साहिब कृपा करें',  बीजेपी-अकाली गठबंधन को लेकर हरसिमरत कौर ने क्या कहा?। बोलना मेरा काम नहीं है, इसलिए मैं अपनी जुबान रोक रही हूं। आपको खुद ही पता चल जाएगा।'

 

यह भी पढ़ें: खेलते-खेलते बस के ऑटोमेटिक दरवाजे में फंसी 7 साल के बच्चे की गर्दन, हो गई मौत 

दिल्ली से अच्छे संबंधों पर जोर

हरसिमरत कौर ने आगे कहा, 'ईश्वर हम पर कृपा करें और लोग हमें हिम्मत दें। ऐसे समझौतों के जरिए, जिनसे विकास और तरक्की से जुड़े काम दिल्ली से किए जाते थे, एक बार फिर पंजाब में उसी विकास और तरक्की की नींव रखी जा रही है, जिससे पंजाब और पंजाब के लोगों को लाभ होगा।' इसे साफ संकेत माना जा रहा है कि दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर शिअद उत्सुक है। 

पीएम से मिले थे सुखबीर बादल

इसी महीने की शुरुआत में संसद के मानसून सत्र के दौरान शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उनके ऑफिस में मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद से शिअद के बीजेपी के सात गठबंधन की अटकलें शुरू हो गई थीं। हालांकि, दोनों दलों की ओर से इस मीटिंग में चर्चा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। 

 

यह भी पढ़ें: बेटी और उसके प्रेमी ने रची साजिश, मां का सिर काटकर नहर में फेंकी लाश

पुराने साथी

पंजाब में बीजेपी और अकाली दल दशकों तक एक साथ रहा है। इसे एक हिंदू-सिख गठबंधन के तौर पर भी देखा जाता था। 2007 से 2017 तक लगातार पार्टी सत्ता में भी रही। हालांकि, 2017 में हार के बाद 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी को झटका लगा। इसके बावजूद हरसिमरत कौर बादल को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिली। इसके बाद 2020 में किसान कानूनों को लेकर अकाली दल ने बीजेपी से रिश्ता तोड़ लिया और गठबंधन और सरकार दोनों से अलग हो गए। इसके बाद दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़े लेकिन दोनों असफल रही। ऐसे में अब फिर से दोनों दलों के बीच गठबंधन की मांग उठ रही है।


और पढ़ें