दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण के बीच हरियाणा सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हरियाणा कैबिनेट ने सोमवार को एग्रीगेटर लाइसेंस के नियमों को मंजूरी दे दी। कैबिनेट के इस फैसले के बाद अब गुरुग्राम, फरीदाबाद समेत NCR के जिलों में ऐप बेस्ड टैक्सी और डिलीवरी कंपनियां पेट्रोल-डीजल की नई गाड़ियां अपने फ्लीट में शामिल नहीं कर पाएंगी। सरकार ने कहा है कि कंपनियां सिर्फ ग्रीन व्हीकल ही शामिल कर सकती हैं।
बता दें कि ग्रीन व्हीकल में CNG, इलेक्ट्रिक, बैटरी से चलने वाली गाड़ियां और अन्य पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने वाली गाड़ियां शामिल हैं। इसके अलावा NCR में मौजूदा फ्लीट में अब केवल CNG या इलेक्ट्रिक तीन पहिया गाड़ियों को ही शामिल करने की अनुमति होगी।
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सरकार ने क्या बताया?
इस मीटिंग में सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि NCR में प्रदूषण कम करने और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए ओला-उबर जैसी एप आधारित टैक्सी और फूड व अन्य डिलीवरी कंपनियों को CNG, इलेक्ट्रिक या कम प्रदूषण करने वाली गाड़ियों को इस्तेमाल करना होगा। इसके साथ ही गाड़ियों में सुरक्षा उपकरण और यात्रियों-ड्राइवरों का बीमा भी जरूरी होगा। कैबिनेट बैठक में हरियाणा मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1993 के तहत इन नियमों को मंजूरी दी गई।
सरकार के एक प्रवक्ता के मुताबिक नए नियमों के अनुसार, अब केवल लेक्ट्रिक (EV), CNG और दूसरे क्लीन फ्यूल वाहनों को ही अनुमति मिलेगी। इसका असर सीधे डिलीवरी कंपनियों पर पड़ेगा, क्योंकि इनकी हजारों गाड़ियां NCR में चलती हैं। यह नियम गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पलवल, झज्जर, नूंह, रेवाड़ी और रोहतक जैसे जिलों में लागू होगा। सबसे ज्यादा असर गुरुग्राम और फरीदाबाद में देखने को मिल सकता है, जहां रोज बड़ी संख्या में लोग कैब और डिलीवरी सर्विस का इस्तेमाल करते हैं।
बढ़ते प्रदूषण को कम करने की कोशिश
दिल्ली-NCR में हर साल प्रदूषण रिकॉर्ड तोड़ रहा है। सर्दियों के दिनों में दिल्ली में दम घुटने लगता है। इसको लेकर पूरा देश चिंतित है। हरियाणा कैबिनेट के इस फैसले पर सरकार का कहना है कि यह फैसला NCR में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए लिया गया है। लंबे समय से दिल्ली-NCR खराब हवा और स्मॉग की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में अब सरकार ग्रीन ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना चाहती है।
ऑटो के लिए बदले नियम
नई पॉलिसी में तीन पहिया ऑटो रिक्शा के लिए भी नियम बदले गए हैं। अब फ्लीट में सिर्फ CNG या इलेक्ट्रिक ऑटो को ही शामिल किया जा सकेगा। इसके साथ ही एग्रीगेटर कंपनियों के लिए कई नए नियम भी लागू किए गए हैं। कंपनियों को अब ड्राइवर वेरिफिकेशन, हेल्पलाइन, शिकायत निवारण सिस्टम और सुरक्षा सुविधाएं देना जरूरी होगा। गाड़ियों में GPS, पैनिक बटन, फर्स्ट एड किट और फायर एक्सटिंग्विशर भी अनिवार्य किए जाएंगे। इसके साथ ही सरकार ने यात्रियों और ड्राइवरों की सुरक्षा पर भी जोर दिया है। नई पॉलिसी के तहत इंश्योरेंस सुविधाएं देना जरूरी होगा।
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कंपनियों पर पड़ेगा असर
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले से शुरुआत में कंपनियों को खर्च बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि V और CNG गाड़ियां खरीदनी पड़ेंगी और इसके लिए खर्च एक साथ करना पड़ेगा। हालांकि, जानकारों का मानना है कि लंबे समय में कंपनियों का खर्च इससे कम हो जाएगा और प्रदूषण भी कम होगा। आने वाले समय में दिल्ली और आसपास के इलाकों में इस तरह के फैसले लिए जा सकते हैं।