हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
का जीवन संघर्ष, सेवा और दृढ़ संकल्प की प्रेरक यात्रा है। उन्होंने शुक्रवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में नाटक 'शून्य से शिखर तक' देखा। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह बात कही।
यह नाटक दादा लखमी चंद राज्य प्रदर्शन और दृश्य कला विश्वविद्यालय (SUPVA), रोहतक ने पेश किया। आयोजन हरियाणा सूचना, जनसंपर्क, भाषा और संस्कृति विभाग के सहयोग से हुआ। नाटक में प्रधानमंत्री की जीवन यात्रा और देश के लिए उनके योगदान को दिखाया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का जीवन हर व्यक्ति को चुनौतियों का सामना करने और लक्ष्य पाने की प्रेरणा देता है। उनके अनुसार मजबूत इरादे और उत्साह के साथ साधारण शुरुआत वाला व्यक्ति भी बड़ी ऊंचाई तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि नाटक में यही भावना बहुत असरदार ढंग से दिखाई गई है।
नायब सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री के जीवन के अलग-अलग पहलुओं को नाटक में पूरे उत्साह और जोश के साथ पेश किया गया। यह बहुत सराहनीय है। उन्होंने खास तौर पर बच्चों के उत्साह की तारीफ की।
नाटक का मंचन देखते मुख्यमंत्री नायब सैनी
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने नाटक में अलग-अलग भूमिका निभाने वाले कलाकारों को बधाई दी। उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों, प्रबंधन और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को भी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस नाटक को ज्यादा से ज्यादा लोगों को देखना चाहिए। इसमें प्रधानमंत्री के जीवन से संघर्ष, मेहनत, सेवा और समर्पण की अहम सीख मिलती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्टर के साथ CM नायब सैनी।
प्रस्तुति के बाद मुख्यमंत्री ने सभागार में मौजूद स्कूली बच्चों से स्नेह के साथ बातचीत की। उन्होंने नाटक में हिस्सा लेने वाले SUPVA के रंगमंच कलाकारों से भी मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया।
'पीएम मोदी का जीवन देश सेवा की भावना'
सूचना, जनसंपर्क, भाषा और संस्कृति विभाग के आयुक्त एवं सचिव के.एम. पांडुरंग ने कहा कि प्रधानमंत्री का जीवन संघर्ष, अटूट संकल्प, मेहनत और देश सेवा की भावना से भरा है। यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोगों को प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि नाटक में प्रधानमंत्री के संघर्ष और सेवा भाव को बहुत सुंदर ढंग से दिखाया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित 'शून्य से शिखर तक' की सबसे बड़ी खासियत वडनगर के रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले एक साधारण बालक के देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद तक पहुंचने की अभूतपूर्व और प्रेरक यात्रा का भावनात्मक व सजीव चित्रण है। नाटक में केवल उनकी राजनीतिक सफलताओं को ही नहीं, बल्कि उनके बचपन के घोर अभाव को भी दिखाया गया है।
युवावस्था में आध्यात्मिक खोज, संन्यास का दौर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक कर्मठ प्रचारक के रूप में किए गए सांगठनिक संघर्ष का भी किस्सा है। नाटक में कोविड काल के दौरान पीएम मोदी के प्रयास, वैश्विक मंच पर भारत का नेतृत्व करने तक के उनके अटूट संकल्प, त्याग और राष्ट्र-प्रथम की भावना को बेहद सशक्त दृश्यों और संवादों के माध्यम से दिखाया गया है।