हरियाणा सरकार की चिराग योजना इन दिनों विवादों में घिर गई है। सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों को पढ़ाने के उद्देश्य से यह योजना लागू की थी लेकिन अब योजना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसी साल सरकार ने इसके लिए इनकम की सीमा 8 लाख रुपये कर दी थी, जिससे ज्यादा लोगों को फायदा मिलने का दावा किया जा रहा था लेकिन अब इस स्किम को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, योग्य छात्रों के लिए 13 मार्च से 30 मार्च के बीच एडमिशन के लिए आवेदन करने की डेट रखी गई थी। इसके बाद अब एडमिशन के लिए 11 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच ड्रॉ निकाला जाएगा और स्कूलों को 15 अप्रैल तक एडमिशन की पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक, खाली सीटों के बदले वेटिंग लिस्ट में शामिल छात्रों को एडमिशन देना जरूरी है। स्कूलों को 30 अप्रैल तक इन छात्रों की डिटेल्स पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी।
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प्राइवेट स्कूलों ने नहीं दी जानकारी
इस योजना के तहत योग्य छात्रों की एडमिशन के लिए माता-पिता को काफी ज्यादा परेशान होना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग ने जनवरी में एक लेटर जारी कर 15 फरवरी तक खाली सीटों की डिटेल्स देने के लिए कहा था लेकिन स्कूलों ने मार्च का आधा महीना बीत जाने के बाद यह डिटेल्स उपलब्ध करवाई। इससे छात्रों को अप्लाई करने में परेशानी हुई और कम सयम मिला। बता दें कि इस योजना के तहत चयनित छात्रों की ट्यूशन फीस का भुगतान राज्य सरकार करती है और बच्चों के माता-पिता को फीस जमा नहीं करनी पड़ती।
बहुत कम छात्र उठा पाते हैं लाभ
इस योजना का लाभ बहुत कम छात्र उठा पाते हैं। पिछले साल 2025-26 के शैक्षणिक सत्र के इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों से आने वाले छात्रों को दाखिला देने में केवल छह स्कूलों ने ही रुचि दिखाई थी। हालांकि, इस साल हरियाणा सरकार ने इस योजना के नियमों में बदलाव किया है लेकिन फिर भी स्कूलों की ओर से जानकारी नहीं दी गई।
पेरेंट्स होते हैं परेशान
दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत एडमिशन करवाने के लिए पिछले साल भी बच्चों के माता-पिता को काफी परेशान होना पड़ा था। रिपोर्ट में बताया गया है कि एडमिशन सुनिश्चित कराने के लिए पूरे साल माता-पिता को शिक्षा विभाग और स्कूलों के बार-बार चक्कर काटने पड़े थे। पेरेंट्स ने आरोप लगाया था कि प्राइवेट स्कूलों की लापरवाही की वजह से जरूरतमंद छात्र इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इस साल सरकार की ओर से सख्त आदेश जारी किए गए हैं लेकिन फिर भी स्कूलों की ओर से कोई खास रुचि इस योजना के लिए नहीं दिखाई गई।
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किसे मिलता है फायदा?
हरियाणा में EWS वर्ग के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन देने के लिए चिराग योजना चलाई गई है। इस इस योजना में सरकार दूसरी कक्षा से लेकर पांचवीं तक के हर स्टूडेंट को 700 रुपए, कक्षा छठी से आठवीं तक 900 रुपए और कक्षा नौवीं से 12वीं तक के हर स्टूडेंट को 1100 रुपए हर महीने फीस के रूप में प्राइवेट स्कूलों को देती है। इस साल सरकार ने इसकी इनकम सीमा 1.80 लाख से बढ़ाकर 8 लाख कर दी गई है, जिसकी गणना फैमिली आईडी के आधार पर होगी। इस योजना का लाभ उन्हीं छात्रों को मिल सकता है जिन्होंने पिछली क्लास की पढ़ाई सरकारी स्कूल से की हो। पिछले सरकारी स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (SLC) लेना भी जरूरी होगा। इस योजना के तहत कुल 34,271 छात्रों की फीस सरकार देती है।