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UP के पानी में सबसे ज्यादा क्रोमियम, सेहत के लिए क्यों बन रहा बड़ा खतरा?

कानपुर और आसपास के इलाकों में औद्योगिक कचरे की वजह से भूजल इतना जहरीला हो गया है कि अब लोगों के खून में भारी मात्रा में क्रोमियम पाया जा रहा है, जो सेहत के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Sora

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उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर, कानपुर देहात और फतेहपुर जिलों से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां के निवासियों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के शरीर में 'क्रोमियम' जैसी जहरीली धातु की मात्रा खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गई है। जिलाधिकारी द्वारा पेश की गई हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रदूषण का असर अब सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह लोगों के खून में मिलकर उनकी सेहत को खोखला कर रहा है।

 

यह सारा मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के हस्तक्षेप के बाद सामने आया है। दरअसल, इन इलाकों में लंबे समय से फैक्ट्रियों का कचरा जमीन में जा रहा था, जिससे यहां का पानी जहरीला हो गया। अब एम्स दिल्ली और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की देखरेख में जब लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए, तो जो नतीजे आए उन्होंने सबको चौंका दिया है।

 

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खून की जांच में क्या निकला?

जांच के पहले चरण में लगभग 586 लोगों के खून के नमूने लखनऊ भेजे गए थे। अब तक मिली 233 रिपोर्टों में से 215 नमूनों में क्रोमियम की मात्रा बहुत ज्यादा पाई गई है। इतना ही नहीं, कुछ लोगों के खून में क्रोमियम के साथ-साथ मर्करी और लेड जैसे खतरनाक तत्व भी मिले हैं। इस जांच में 5 साल से कम उम्र के बच्चों को भी शामिल किया गया था, जो इस प्रदूषण के सबसे आसान शिकार बन रहे हैं।

क्रोमियम क्यों है बड़ा खतरा?

क्रोमियम दो रूपों में पाया जाता है जैसे Trivalent जो शरीर के लिए कुछ हद तक जरूरी है और Hexavalent जो बेहद जहरीला है।

 

हैक्सावेलेंट में कार्सिनोजेनिक गुण पाया जाता है जिसमें कैंसर पैदा करने वाला तत्व पाया जाता है। यह हमारी कोशिकाओं यानी की सेल्स में घुसकर  जेनेटिक म्यूटेशन तक कर सकता है। लंबे समय तक सेवन से लीवर और किडनी फेल होने का खतरा रहता है। 

 

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पानी में सबसे खतरनाक मेटल कौन सा है?

यूं तो कई धातुएं नुकसानदेह हैं लेकिन आर्सेनिक को सबसे घातक माना जाता है। इसे 'धीमा जहर' कहा जाता है। यह स्किन कैंसर, फेफड़ों के रोग और 'ब्लैक फुट' जैसी बीमारियों का कारण बनता है। यह शरीर के एंजाइम सिस्टम को ब्लॉक कर देता है, जिससे धीरे-धीरे अंग काम करना बंद कर देते हैं।

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत के जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, भारी धातुओं का पानी में मिलना प्राकृतिक और मानव निर्मित दोनों कारणों से होता है। क्रोमियम के अलावा, आर्सेनिक और लेड को सबसे खतरनाक धातुओं की श्रेणी में रखा गया है।  फिलहाल, कानपुर के प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं और जिन लोगों की रिपोर्ट खराब आई है, उनका इलाज शुरू कर दिया गया है।

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