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केरल को 14.50 रुपये में बिजली देगा हिमाचल, पंचकूला को पानी बेचने पर मंथन

हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने बिजली पानी से कमाई की नई रणनीति तैयार की है। केरल को ₹14.50 में बिजली देने के साथ हिमाचल अब पंचकूला को पानी देने पर विचार कर रहा है।

Sukhvinder Singh Sukhu

सुखविंदर सिंह सुक्खू, Photo Credit- X/SukhuSukhvinder

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हिमाचल प्रदेश अब अपनी प्राकृतिक संपदाओं से अधिक से अधिक राजस्व जुटाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। सरकार ने बिजली बेचने के लिए बाजार के हिसाब से बेहतर कीमत हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि केरल को करीब 14.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचने को लेकर कीमत तय की जा रही है। वहीं, तमिलनाडु को फिलहाल 13.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली दी जा रही है। मार्च के बाद इस दर में संशोधन किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री ने सोमवार को नए मुख्यमंत्री कार्यालय का उद्घाटन करने के बाद कहा कि बिजली के रेट हिमाचल सरकार स्वयं तय करेगी। उन्होंने कहा कि पहले राज्य विद्युत बोर्ड करीब पांच से साढ़े पांच रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचता था, लेकिन अब बिजली की बिक्री का जिम्मा ऊर्जा निदेशालय को दिया जाएगा।

पीक टाइम में महंगी बिजली बेचने की तैयारी

सरकार की रणनीति पीक टाइम में बिजली की बेहतर कीमत हासिल करने की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मांग बढ़ने के समय बिजली का अधिक मूल्य वसूला जाएगा। इससे प्रदेश के बिजली संसाधनों से मिलने वाले राजस्व को बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि व्यवस्था परिवर्तन के प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 2032 तक हिमाचल देश का सबसे अमीर राज्य बनकर उभरेगा। उनके अनुसार, सभी तरह के व्यय के बाद प्रदेश सरकार की वार्षिक आय 7,000 करोड़ रुपये से अधिक होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पेंशनरों को भुगतान करने के बाद कर्मचारियों के लंबित बकाये का भुगतान भी अगले कुछ महीनों में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

 

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अब सतलुज का पानी भी कमाई का जरिया

बिजली के बाद हिमाचल की नजर अब पानी से राजस्व जुटाने पर भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा के पंचकूला के शहरी और औद्योगिक क्षेत्र की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए हिमाचल सरकार संभावनाओं पर विचार कर रही है। इसके लिए सुरंग के माध्यम से पंचकूला तक पानी पहुंचाने की योजना पर भी मंथन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा कोई बंधन नहीं है कि हिमाचल सतलुज नदी के पानी को रोककर अपने हितों के लिए उसका उपयोग नहीं कर सकता। इसी आधार पर प्रदेश सरकार पानी बेचकर राजस्व जुटाने की संभावनाएं तलाश रही है।

 

यानी सरकार की रणनीति अब सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि बिजली और पानी, दोनों प्राकृतिक संसाधनों को प्रदेश की आय बढ़ाने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।


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