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हिमाचल निकाय चुनाव में जीत गई बीजेपी, फिर कांग्रेस क्यों मना रही जश्न? वजह जानिए

हिमाचल प्रदेश के नगर निकाय चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद अब दोनों राजनीतिक दल जीत का दावा कर रहे हैं। ज्यादातर सीटों पर बीजेपी समर्थित उम्मीदवार जीते हैं लेकिन फिर भी कांग्रेस जश्न मना रही है।

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हिमाचल के सीएम और पूर्व सीएम, Photo Credit: AI

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हिमाचल प्रदेश के नगर निकाय चुनावों के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति गर्म हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि चुनाव के बाद कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही खुद को विजेता बता रही हैं।  इन चुनाव नतीजों को अब 2027 विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल कहा जा रहा था। बीजेपी का कहना था कि कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जनता वोट करेगी क्योंकि पार्टी की राज्य सरकार से जनता खुश नहीं है। कांग्रेस अपनी घोषणाओं और राज्य सरकार के काम के दम पर निकायों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती थी। चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही दल अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। 

 

हिमाचल प्रदेश में 47 नगर परिषद और नगर पंचायतों के लिए मतदान हुआ था। इसके अलावा चार नगर निगमों के लिए भी जनता ने मतदान किया था जिनमें धर्मशाला, मंडी, पालमपुर और सोलन शामिल थे। राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक चुनाव में करीब 69 प्रतिशत से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया। सोलन, बिलासपुर और ऊना जिला में बीजेपी ने बढ़त बनाई लेकिन राज्य की राजनीति में अहम माना जाने वाले जिला कांगड़ा में बीजेपी पिछड़ गई है। 

 

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कांग्रेस क्यों खुश है?

सत्तारूढ़ कांग्रेस का दावा है कि उसके समर्थित उम्मीदवारों ने 47 में से 31 नगर निकायों में जीत हासिल की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि यह परिणाम राज्य सरकार की नीतियों और कामकाज पर जनता के भरोसे को दिखाते हैं। चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के खिलाफ लहर की बात की जा रही थी लेकिन साढ़े तीन साल की एंटी इनकंबेंसी के बावजूद कांग्रेस के खिलाफ एकतरफा लहर नहीं चली। 

 

 

कांग्रेस खास तौर पर कांगड़ा और चंबा जैसे इलाकों में प्रदर्शन से उत्साहित दिखाई दे रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार बनने के बाद यह पहला बड़ा चुनावी टेस्ट था और जनता ने कांग्रेस को समर्थन दिया है। कांग्रेस यह भी कह रही है कि बीजेपी लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रही थी, लेकिन निकाय चुनावों में जनता ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को जीत दिलाकर जवाब दिया। 

 

बीजेपी खुद को क्यों मान रही विजेता?

दूसरी तरफ बीजेपी का कहना है कि चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं लड़े गए थे, इसलिए कई जगह निर्दलीय जीत को भी बीजेपी समर्थन की जीत माना जाना चाहिए। पार्टी ने कई नगर परिषद और नगर पंचायतों में अच्छा प्रदर्शन किया है। बीजेपी खास तौर पर मनाली, परवाणू और कंडाघाट जैसे क्षेत्रों में प्रदर्शन को बड़ी सफलता मान रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मनाली नगर परिषद में बीजेपी समर्थित उम्मीदवारों ने सभी सीटें जीत लीं हैं। इसके साथ ही पार्टी ने सोलन में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। पार्टी के नेता इस जीत का जश्न मना रहे हैं।

 

पार्टी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल बनने लगा है और शहरी क्षेत्रों में बीजेपी की पकड़ मजबूत हुई है। बीजेपी इन नतीजों को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सकारात्मक संकेत मान रही है।  प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार की उल्टी गिनती अब शुरू हो गई है। 

निर्दलीय बने किंग मेकर

इन चुनावों की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव पार्टी चिन्ह पर नहीं लड़े गए। यही वजह है कि दोनों पार्टियां समर्थित उम्मीदवारों की जीत को अपने पक्ष में बता रही हैं। कई जगहों पर निर्दलीय उम्मीदवार किंग मेकर की भूमिका में आ गए हैं। ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी के लिए निर्दलीय उम्मीदवार काफी अहम हो गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हिमाचल में स्थानीय चुनाव हमेशा विधानसभा चुनावों का मूड सेट करने वाले माने जाते हैं। इसलिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों इन नतीजों को अपने-अपने तरीके से जनता का समर्थन बता रही हैं।

 

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2027 में होंगे विधानसभा चुनाव

हिमाचल में अगले विधानसभा चुनाव 2027 के अंत में होने हैं। ऐसे में इन निकाय चुनावों को दोनों पार्टियों के लिए बड़े राजनीतिक टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस जहां सरकार पर जनता के भरोसे की बात कर रही है, वहीं बीजेपी इसे शहरी क्षेत्रों में अपनी वापसी का संकेत बता रही है। कांग्रसे के लिए राहत की खबर है कि एंटी इनकमबेंसी के बावजूद पार्टी ने कई निकायों में अच्छा प्रदर्शन किया है। 


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