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राजस्थान को बिजली बेचकर कितना कमाएगा हिमाचल? सीएम सुक्खू ने बताया आंकड़ा 

हिमाचल प्रदेश राजस्थान को बिजली बेचने जा रहा है। दोनों राज्यों में 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचने का समझौता हुआ है।

योजनाओं का शुभारम्भ करते मुख्यमंत्री सुक्खू, Photo Credit-DPR

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आर्थिक संसाधनों को मजबूत करने और प्रदेश की आर्थिकी को नई दिशा देने की कोशिशों के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार ने राजस्थान को बिजली बेचकर अगले चार महीनों में 400 करोड़ रुपये की आमदनी होने का दावा किया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को चंबा जिला के चुराह विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने राजस्थान को 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बेचने का समझौता किया है। सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था से राज्य को आगामी चार माह में करीब 400 करोड़ रुपये की आमदनी होगी।

 

यह सौदा ऐसे समय में सामने आया है, जब हिमाचल प्रदेश अपनी वित्तीय चुनौतियों के बीच आय के नए स्रोत तलाश रहा है। ऐसे में बिजली बिक्री से होने वाली संभावित कमाई को सरकार संसाधन सृजन की दिशा में एक अहम कदम के तौर पर पेश कर रही है।

15.50 रुपये प्रति यूनिट का हिसाब, कितनी बिजली बिकेगी?

मुख्यमंत्री की ओर से बताए गए आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान को बिजली बेचने की दर 15.50 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है और चार महीने में 400 करोड़ रुपये की आमदनी का अनुमान है। इन दोनों आंकड़ों को आधार बनाकर बिजली की मात्रा का मोटा गणित भी समझा जा सकता है। यदि 400 करोड़ रुपये को 15.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से विभाजित किया जाए तो करीब 25.81 करोड़ यूनिट बिजली की बिक्री का हिसाब निकलता है। यानी लगभग 258.1 मिलियन यूनिट बिजली के बराबर बिक्री मूल्य।

 

हालांकि, यह केवल घोषित दर और अनुमानित आमदनी पर आधारित गणना है। वास्तविक बिजली आपूर्ति की मात्रा, अनुबंध की शर्तें, बिक्री अवधि, बिजली की उपलब्धता और भुगतान व्यवस्था की विस्तृत जानकारी सामने आने पर ही सौदे की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

 

यहां एक अहम अंतर समझना भी जरूरी है। 400 करोड़ रुपये की अनुमानित आमदनी को सीधे 400 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा नहीं माना जा सकता। बिजली उत्पादन, खरीद अथवा अन्य परिचालन लागत, ट्रांसमिशन शुल्क, बिजली की उपलब्धता और अनुबंध की शर्तों के आधार पर वास्तविक आर्थिक लाभ अलग हो सकता है।

 

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बिजली से कमाई, आर्थिक दबाव के बीच बड़ी उम्मीद

हिमाचल प्रदेश जलविद्युत उत्पादन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। प्रदेश की नदियां और जलविद्युत परियोजनाएं लंबे समय से ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ राज्य के लिए राजस्व का आधार रही हैं। ऐसे में बिजली को बेहतर कीमत पर बेच पाना राज्य की आय बढ़ाने का अवसर बन सकता है। इस सौदे की वास्तविक सफलता का आकलन केवल घोषित बिक्री मूल्य से नहीं, बल्कि इस बात से होगा कि बिजली बेचने के बाद राज्य के पास कितना अतिरिक्त राजस्व बचता है और यह कमाई कितनी नियमित बन पाती है।

बिजली बिक्री से होने वाली यह संभावित आय राज्य सरकार की वित्तीय जरूरतों के बीच महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। फिर भी इसे स्थायी आय का स्रोत मानने के लिए बिजली की उपलब्धता, भविष्य के बाजार भाव और बिक्री समझौते की अवधि जैसी जानकारियां भी अहम रहेंगी।

बैरास्यूल परियोजना में भी हिस्सेदारी बढ़ाने की पैरवी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार 180 मेगावाट की बैरास्यूल जलविद्युत परियोजना के संचालन के 44 वर्ष पूरे होने के बाद इसमें हिमाचल की निःशुल्क बिजली हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग प्रभावी ढंग से उठा रही है। इस पहल को भी प्रदेश के संसाधनों से अधिक लाभ हासिल करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। यदि राज्य की हिस्सेदारी बढ़ती है तो इससे भविष्य में उपलब्ध बिजली और संभावित राजस्व पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय और लागू होने वाली व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।

वाइल्ड फ्लॉवर हॉल से 401 करोड़ और अब सालाना 37 करोड़ का दावा

मुख्यमंत्री ने शिमला स्थित वाइल्ड फ्लॉवर हॉल संपत्ति का जिक्र करते हुए कहा कि इसका मामला वर्ष 2003 से लंबित था। प्रदेश सरकार ने कानूनी पैरवी के बाद इसमें जीत हासिल की और राज्य को 401 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि अब ई-नीलामी के माध्यम से प्रदेश को प्रतिवर्ष करीब 37 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, पिछले 23 वर्षों में इस संपत्ति से राज्य को कोई राजस्व प्राप्त नहीं हुआ था। बिजली बिक्री, जलविद्युत परियोजनाओं में हिस्सेदारी और सरकारी संपत्तियों से आय बढ़ाने के इन उदाहरणों के जरिए सरकार संसाधन सृजन को अपनी आर्थिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा बता रही है।

 

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भ्रष्टाचार पर प्रहार और आत्मनिर्भर हिमाचल का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के चोर दरवाजे बंद कर हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद सरकार संसाधन जुटाने और जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य को मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान बंद कर दिया है। इसके अतिरिक्त, प्राकृतिक आपदा के बाद प्रधानमंत्री के प्रदेश दौरे के दौरान घोषित 1,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी अभी तक राज्य को प्राप्त नहीं हुई है। सरकार के सामने ऐसे में एक तरफ विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए धन जुटाने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर उपलब्ध संसाधनों से अधिकतम आय हासिल करने की जरूरत भी है।

चुराह को चार सीबीएसई स्कूलों की सौगात

चुराह विधानसभा क्षेत्र के भंजराड़ू कला मंच में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री ने चार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को सीबीएसई से संबद्ध करने की घोषणा की। इनमें हिमगिरी, थल्ली, जज्जाकोठी और मारूंड स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न पंचायतों में सड़क निर्माण के लिए आवश्यक बजट उपलब्ध करवाने की घोषणा भी की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम दो से तीन सीबीएसई स्कूल खोलने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में 100 से अधिक नए सीबीएसई स्कूल खोलने जा रही है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में मेरिट के आधार पर 2,700 से अधिक शिक्षकों की भर्ती की गई है। उन्होंने दावा किया कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधारों के चलते हिमाचल वर्ष 2025 में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में देश में पांचवें स्थान पर पहुंचा, जबकि वर्ष 2021 में प्रदेश 21वें स्थान पर था।

 

महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक सहायता का ऐलान

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार अगले महीने से ‘मुख्यमंत्री का अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ शुरू करेगी। योजना के तहत पात्र गरीब परिवारों की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली तथा स्वास्थ्य बीमा कार्ड के माध्यम से निःशुल्क चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, चुराह विधानसभा क्षेत्र की करीब 15 हजार महिलाएं इस योजना से लाभान्वित होंगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कच्ची हल्दी पर 150 रुपये प्रति किलोग्राम, गेहूं पर 80 रुपये प्रति किलोग्राम और मक्की पर 50 रुपये प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है। वहीं गाय के दूध के लिए 61 रुपये और भैंस के दूध के लिए 71 रुपये प्रति लीटर समर्थन मूल्य प्रदान किया जा रहा है।

 

जनसभा में कांग्रेस महासचिव एवं स्थानीय वरिष्ठ कांग्रेस नेता यशवंत खन्ना ने क्षेत्र की विकासात्मक जरूरतों का जिक्र किया। इस अवसर पर विधायक नीरज नैय्यर, पूर्व मंत्री आशा कुमारी, पूर्व विधायक सुरेंद्र भारद्वाज, जिला परिषद अध्यक्ष रेखा ठाकुर, प्रदेश हज कमेटी के अध्यक्ष दिलदार अली भट्ट, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष भूपिंद्र ठाकुर, प्रकाश बटाली सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

 


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