राजस्थान के बिवाल परिवार के तीन लोगों दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल और विकास बिवाल को पुलिस ने पकड़ा है। इन पर आरोप है कि दिनेश और मांगीलाल ने लीक हुआ पेपर अपने ही परिवार के बच्चों को दिया था। इस परिवार के दो बच्चों ने इस साल परीक्षा दी है जबकि पांच बच्चे पिछले साल ही परीक्षा पास करके अलग-अलग सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन ले चुके हैं। इन बच्चों का पुराना स्कूल रिकॉर्ड बहुत ही साधारण रहा है। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) अब इस मामले की जांच कर रही है कि क्या इन बच्चों को पिछले साल किसी गलत तरीके से मदद दी गई थी।
दिनेश और मांगीलाल के पकड़े जाने के बाद सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज में फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट विकास बिवाल अचानक गायब हो गया था जिसे दो दिन बाद पुलिस ने पकड़ लिया। सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल बी.पी मीना ने बताया कि विकास इस साल जनवरी महीने से ही लगातार कॉलेज से गायब चल रहा था। वह महीने में सिर्फ एक या दो बार ही कॉलेज आता था और एग्जाम्स में उसे 100 में से सिर्फ 30 नंबर ही मिले थे। विकास को बारहवीं क्लास में सिर्फ 55 परसेंट नंबर मिले थे लेकिन मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम में उसने 86 परसेंट नंबर हासिल किए थे।
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पलक का स्कूल रिकॉर्ड
दिनेश और मांगीलाल के दिवंगत भाई घनश्याम की बेटी पलक जयपुर के सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज की स्टूडेंट है। पलक को दसवीं क्लास में 93 परसेंट और बारहवीं क्लास में 89 परसेंट नंबर मिले थे जबकि मेन एग्जाम में उसने 88.61 परसेंट नंबर हासिल किए थे। मेडिकल कॉलेज के अंदर होने वाले टेस्ट में उसका परफॉर्मेंस बहुत ही साधारण रहा। अपने चाचा दिनेश बिवाल के पकड़े जाने की खबर मिलने के बाद वह बिना किसी को बताए हॉस्टल छोड़कर चली गई।
प्रगति का रिकॉर्ड
मांगीलाल की बेटी प्रगति दौसा के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। उसने अपने पिता और भाई के पकड़े जाने वाले दिन ही कॉलेज से छुट्टी ले ली थी। प्रगति ने कोरोना के समय बारहवीं क्लास पास की थी जिसमें उसे 91 परसेंट नंबर मिले थे और इसके बाद मेन एग्जाम में उसने 89 परसेंट नंबर हासिल किए थे।
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ऋषि और अमन का परीक्षा रिकॉर्ड
इस साल एग्जाम देने वाले इसी परिवार के दो और लड़के ऋषि और अमन पढ़ाई से बहुत कमजोर रहे हैं। ऋषि को बारहवीं क्लास में पास होने के लिए ग्रेस मार्क्स दिए गए थे तब जाकर वह सिर्फ 50 परसेंट नंबर ला पाया था। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन अब इन सभी बच्चों के स्कूल के नंबर, कॉलेज में उनकी अटेंडेंस और पकड़े गए आरोपियों को रिकॉर्ड की जांच कर रही है।