हिमाचल प्रदेश में बंदरों की संख्या का पंचायतवार ब्योरा जुटाया जाएगा। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वन्यजीव विंग से प्रदेश में बंदरों की संख्या से संबंधित पंचायतवार डेटा उपलब्ध करवाने को कहा है। इससे बंदरों की संख्या और उनके क्षेत्रवार वितरण से जुड़ी जानकारी सामने लाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को यहां हिमाचल प्रदेश राज्य वन्यजीव बोर्ड की 12वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में वन्यजीव संरक्षण के साथ औद्योगिक विकास, सीमावर्ती क्षेत्रों में सामरिक आधारभूत ढांचे के निर्माण, सड़क सुविधाओं के विस्तार और गैर-वानिकी गतिविधियों के लिए वन भूमि के इस्तेमाल से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विचार किया गया। चर्चा के दौरान विकास की जरूरतों, राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया गया।
बंदरों की संख्या का पंचायतवार ब्योरा जुटाने के निर्देश
बैठक में बंदरों की संख्या का पंचायतवार डेटा मांगे जाने का मुद्दा खास रहा। पंचायत स्तर पर आंकड़े उपलब्ध होने से अलग-अलग क्षेत्रों में बंदरों की मौजूदगी और उनके वितरण की तस्वीर स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि आंकड़े जुटाने के लिए वन विभाग कौन-सी प्रक्रिया अपनाएगा और सर्वेक्षण कब तक पूरा होगा।
मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अन्य विषयों की भी समीक्षा की। मंडी जिले के सुकेत वन मंडल में कीरतपुर-मनाली फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग-154 के पुंग-भुवाणा टनल खंड पर सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों को हो रहे नुकसान को रोकने के उपायों पर चर्चा की गई। अधिकारियों को वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सड़क हादसों में उनकी मृत्यु की घटनाओं को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता बताई गई।
सीमावर्ती क्षेत्रों में चौकियों के लिए वन भूमि के प्रस्ताव
बैठक में सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़े प्रस्ताव भी प्रमुखता से उठे। लाहौल-स्पीति जिले की स्पीति तहसील के मुहाल लालुंग और धार चोकुला काजा में बॉर्डर आउट पोस्ट लालुंग की स्थापना के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 17वीं बटालियन के पक्ष में 1.78.20 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई।
यह बटालियन किन्नौर जिले के रिकांगपिओ में स्थित है। इसी तरह, किन्नौर जिले में फॉरवर्ड पोस्ट निथल थाच की स्थापना के लिए कुल्लू स्थित आईटीबीपी की दूसरी बटालियन के पक्ष में 1.60 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव भी विचार के लिए रखा गया।
किन्नौर जिले की सांगला तहसील में नागस्ती के समीप उत्तरी सीमा पर सैन्य आधारभूत ढांचे के विकास के लिए रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य के भीतर 00-27-50 हेक्टेयर वन भूमि 11 महार रेजिमेंट/मुख्यालय 136 (स्वतंत्र) इन्फैंट्री ब्रिगेड समूह के पक्ष में हस्तांतरित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।
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संसारपुर टैरेस में दवा निर्माण इकाई को मंजूरी
औद्योगिक विकास से जुड़े प्रस्तावों के तहत बोर्ड ने कांगड़ा जिले के संसारपुर टैरेस औद्योगिक क्षेत्र के फेज-1 में प्लॉट नंबर 53 और 54 पर मैसर्स सीएमजी बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड की ओर से सक्रिय औषधि सामग्री (एपीआई) और इंटरमीडिएट्स निर्माण इकाई स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की। इसके अतिरिक्त, मैसर्स गोयल फर्नेस प्राइवेट लिमिटेड की मौजूदा सेकेंडरी मेटलर्जिकल इकाई के विस्तार प्रस्ताव पर भी चर्चा की गई।
प्रस्ताव के अनुसार, कंपनी की एमएस इंगोट्स उत्पादन क्षमता को मौजूदा 19,200 टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 96,600 टन प्रतिवर्ष किया जाना है। विस्तार योजना में अतिरिक्त इंडक्शन फर्नेस, कंटीन्यूअस कास्टिंग मशीन और रोलिंग मिल स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसके माध्यम से सालाना 77,280 टन राउंड, एंगल, चैनल, टीएमटी बार और फ्लैट्स का उत्पादन किया जाना प्रस्तावित है।
शिकारी देवी अभयारण्य में सड़क चौड़ी करने का प्रस्ताव
मंडी जिले के सराज वन मंडल में स्थित शिकारी देवी वन्यजीव अभयारण्य के भीतर भुलाह-शिकारी देवी सड़क के विस्तारीकरण और उन्नयन का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। इसके लिए हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के सराज मंडल के पक्ष में 4.72 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करने पर विचार किया गया। यह प्रस्ताव वन्यजीव अभयारण्य के भीतर सड़क संपर्क सुविधाओं के विकास से जुड़ा है।
बोर्ड की बैठक में इन परियोजनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद जारी जानकारी के अनुसार संबंधित प्रस्तावों को लागू वैधानिक प्रावधानों तथा वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मंजूरी प्रदान की गई।
बनखंडी प्राणी उद्यान का काम तेज करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कांगड़ा जिले के देहरा स्थित बनखंडी में निर्माणाधीन दुर्गेश अरण्य प्राणी उद्यान की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। बैठक में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यजीव विंग और हिमाचल प्रदेश डाक परिमंडल, शिमला के सहयोग से जारी दो पोस्टकार्ड श्रृंखलाओं का विमोचन किया गया। इनका नाम ‘हिमाचल्स वाइल्ड आइकॉन्स’ और ‘हिमाचल्स वाइल्ड हेरिटेज’ है।