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यूपी में ग्राम पंचायत सचिव पदों पर कैसे होगी भर्ती? पूरा समीकरण समझिए

यूपी में 58 हजार ग्राम पंचायत के पद हैं। वर्तमान में 16 हजार ग्राम पंचायत अधिकारी तैनात हैं। पढ़ें रिपोर्ट।

Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। Photo Credit: PTI

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उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों में वर्षों से चल रही सचिवों की कमी को दूर करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने 13,116 ग्राम पंचायत अधिकारियों (पंचायत सचिव) के नए पद सृजित करने का निर्णय लिया है। पंचायती राज विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। भर्ती प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में 4,372 पदों के सृजन को हरी झंडी मिल चुकी है।

प्रदेश में करीब 58 हजार ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 16 हजार ग्राम पंचायत अधिकारी ही तैनात हैं। इसके चलते लगभग 42 हजार ग्राम पंचायतों का काम अतिरिक्त प्रभार के सहारे चल रहा है। एक सचिव को कई-कई ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिससे विकास कार्य और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। 

हर पंचायत में अलग सचिव तैनात करने की तैयारी

सरकार का लक्ष्य प्रत्येक ग्राम पंचायत में अलग ग्राम पंचायत अधिकारी की तैनाती करना है। माना जा रहा है कि नई भर्ती के बाद अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था काफी हद तक समाप्त होगी और पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। साथ ही ग्रामीणों को प्रमाण पत्र, योजनाओं और अन्य सरकारी सेवाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।

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तीन चरणों में पूरी होगी भर्ती

पंचायती राज विभाग के अनुसार भर्ती प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। पहले चरण में 4,372 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद शेष पदों पर भी भर्ती कर सभी ग्राम पंचायतों में सचिवों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना है।

वीपीओ और वीडीओ के एकीकरण पर फैसला टला

बैठक में ग्राम पंचायत अधिकारी (VPO) और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) के संवर्ग को मिलाकर एकीकृत कैडर बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी। फिलहाल दोनों संवर्ग पहले की तरह अलग-अलग ही कार्य करेंगे।

 

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ग्रामीण विकास को मिलेगी रफ्तार

सरकार का मानना है कि नए पदों के सृजन और भर्ती से पंचायत स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी। इससे विकास योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी, सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से लोगों तक पहुंचेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में शासन की कार्यक्षमता बढ़ेगी। माना जा रहा है कि यह फैसला आगामी वर्षों में पंचायत व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम कदम साबित होगा।


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