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शाही खजाने के नाम पर करोड़ों की ठगी, हैदराबाद में हुआ बड़ा कांड

शासन के शाही खजाने के नाम पर हैदराबाद के कारोबारी से 50.8 करोड़ की बड़ी ठगी हुई है। जालसाजों ने सरकारी तिजोरी से गहने छुड़ाने का झांसा देकर करोड़ों हड़प लिए और चुपचाप खजाना लेकर गायब हो गए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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तेलंगाना के हैदराबाद में रहने वाले एक रियल एस्टेट और फाइनेंस कारोबारी राजेश अग्रवाल के साथ शासन काल के शाही गहनों के नाम पर 50.8 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। इस पूरी साजिश को कथित तौर पर मोहम्मद जाकिर उस्मान और सुकेश गुप्ता (MBS ज्वेलर्स का मालिक) ने मिलकर अंजाम दिया है। यह मामला साल 2016 में शुरू हुआ था।

 

जाकिर उस्मान और सुकेश गुप्ता, राजेश अग्रवाल के पास एक बड़ा ऑफर लेकर आए। उन्होंने बताया कि शासन काल के नवाब जहीर यार जंग के सोने, चांदी और कीमती रत्नों से भरे 5 बड़े बक्से सरकारी विभाग (कमिश्नर ऑफ सर्वे, सेटलमेंट एंड लैंड रिकॉर्ड्स) के पास जमा हैं। उन्होंने दावा किया कि वे इन गहनों को वापस पाने के लिए उनके असली वारिसों की तरफ से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

 

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आरोपियों ने राजेश अग्रवाल को झांसा दिया कि इन बेशकीमती गहनों को सरकारी कब्जे से छुड़ाने के लिए बड़ी रकम की जरूरत है, जैसे कि कानूनी फीस और सरकारी क्लीयरेंस का खर्च। उन्होंने वादा किया कि अगर राजेश यह पैसा निवेश करते हैं, तो गहने बाहर आने पर उन्हें उसमें से एक बड़ा हिस्सा दिया जाएगा। राजेश उनकी बातों में आ गए और 3 अक्टूबर 2016 को दोनों पक्षों के बीच एक लिखित समझौता हुआ।

50.8 करोड़ का भुगतान

समझौते के बाद, जून 2016 से फरवरी 2018 के बीच राजेश अग्रवाल ने कुल 50.8 करोड़ रुपये का भुगतान किया। यह पूरी रकम चेक और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए सुकेश गुप्ता की दो मुख्य कंपनियों जिसका नाम  MBS ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड और आशी रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों में जमा की गई। राजेश को लगातार यह भरोसा दिलाया गया कि उनके पैसे का इस्तेमाल सरकारी और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने में किया जा रहा है।

 

धोखाधड़ी का पता तब चला जब तेलंगाना सरकार ने उन 5 जेवरात के बक्सों को रिलीज करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया। आदेश मिलने के बावजूद जाकिर उस्मान और सुकेश गुप्ता ने राजेश अग्रवाल को इसकी खबर तक नहीं लगने दी। उन्होंने चुपचाप सरकारी कस्टडी से वे बक्से निकलवा लिए और उन्हें बाजार में बेचने की कोशिश करने लगे। जब राजेश को इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने मामले की पड़ताल की और पाया कि उनके द्वारा निवेश किया गया पैसा असल में गहनों को छुड़ाने में लगा ही नहीं, बल्कि आरोपियों ने उसे अपने निजी इस्तेमाल के लिए दूसरी जगहों पर डायवर्ट कर दिया था।

 

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आरोपियों का पुराना रिकॉर्ड

ठगे जाने का अहसास होने पर राजेश अग्रवाल ने हैदराबाद पुलिस की सेंट्रल क्राइम स्टेशन (CCS) में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जाकिर उस्मान और सुकेश गुप्ता कि खिलाफ विश्वासघात (Section 406), धोखाधड़ी (Section 420) और आपराधिक साजिश (Section 120B) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सुकेश गुप्ता का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है और वह पहले से ही प्रवर्तन  निदेशालय (ED) की जांच का सामना कर रहा है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन गहनों को कहां छिपाया गया है और 50 करोड़ से ज्यादा की रकम को कहां ठिकाने लगाया गया है।

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