हैदराबाद में हुई एक दुखद सड़क दुर्घटना ने एक बार फिर फॉस्ट डिलीवरी सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या समय से पहले ऑर्डर पहुंचाने का दबाव इतना बढ़ गया है कि मेहनतकश लोगों की जान की कीमत कम हो गई है? 25 साल का अभिषेक, जो पढ़ाई के साथ-साथ डिलीवरी का काम करके अपने परिवार को संभाल रहा था, इसी दबाव की भेंट चढ़ गया।
सोमवार देर रात मेहदीपट्टनम इलाके में एक क्विक ई-कॉमर्स कंपनी से जुड़े डिलीवरी पार्टनर की सड़क हादसे में मौत हो गई। मृतक की पहचान के. अभिषेक के रूप में हुई है, जो शेखपेट का रहने वाला था और बीबीए अंतिम वर्ष का छात्र था। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए वह डिलीवरी का काम करता था।
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हादसा कैसे हुआ?
मेहदीपट्टनम पुलिस के अनुसार, अभिषेक टोलिचौकी की ओर एक ऑर्डर देने जा रहा था। इसी दौरान उसकी बाइक अचानक फिसल गई। पीछे से आ रही एक प्राइवेट ट्रैवल बस उसे कुचलती हुई निकल गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि वह ऑर्डर समय पर पहुंचाने की जल्दी में था। पुलिस ने गिग वर्कर्स से अपील की है कि वे हमेशा हेलमेट पहनें और जल्दबाजी से बचें।
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यूनियन का गुस्सा और मुआवजे की मांग
इस हादसे के बाद गिग वर्कर्स यूनियन में नाराजगी देखी जा रही है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने इस घटना के लिए '10 मिनट डिलीवरी मॉडल' को जिम्मेदार ठहराया है। यूनियन के संस्थापक शेख सलाउद्दीन ने कहा कि बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तो समय पर शुरू हो जाते हैं लेकिन जब कोई वर्कर सड़क पर जान गंवाता है, तो मुआवजा और बीमा देने में देरी क्यों होती है? वर्कर इंसान हैं, मशीन नहीं।
यूनियन ने तेलंगाना के श्रम मंत्री को पत्र लिखकर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। इसमें अभिषेक के परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने, सभी गिग वर्कर्स पर वर्कमैन कम्पनसेशन एक्ट लागू करने और 10 मिनट जैसी खतरनाक डिलीवरी समयसीमा को खत्म करने की मांग शामिल है।
अभिषेक का पोस्टमार्टम उस्मानिया जनरल अस्पताल में किया गया, जिसके बाद शव परिवार को सौंप दिया गया। पुलिस अब बाइक की रफ्तार और हादसे की पूरी वजह की जांच कर रही है।