संजय सिंह, पटना। भारत-नेपाल की खुली सीमा पर अब पहले जैसी आसानी नहीं रह गई है। नेपाल सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारतीय नागरिकों के लिए पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया है। शनिवार से लागू हुए इस नए नियम के बाद बिहार के अररिया जिले स्थित जोगबनी बॉर्डर पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। बिना पहचान पत्र पहुंचे सैकड़ों यात्रियों को नेपाल पुलिस ने सीमा से ही वापस लौटा दिया।
सुबह जैसे ही कोलकाता से आने वाली ट्रेन जोगबनी स्टेशन पहुंची, बड़ी संख्या में यात्री नेपाल जाने के लिए सीमा की ओर बढ़े। लेकिन नेपाल प्रशासन की सख्ती ने यात्रियों की रफ्तार रोक दी। सीमा पर तैनात नेपाल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने हर व्यक्ति की पहचान पत्र जांच शुरू कर दी। आधार कार्ड, वोटर आईडी या सरकार द्वारा जारी अन्य वैध दस्तावेज दिखाने के बाद ही लोगों को नेपाल में प्रवेश की अनुमति दी गई।
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बॉर्डर पर लगी लंबी कतारें
पहचान पत्र जांच की वजह से बॉर्डर पर लंबी कतारें लग गईं। पैदल यात्रियों के साथ-साथ छोटे-बड़े वाहनों की भी भीड़ जमा हो गई। कई लोग ऐसे थे जो वर्षों से बिना किसी औपचारिक जांच के नेपाल आते-जाते रहे थे। अचानक लागू हुए नियम ने उन्हें परेशानी में डाल दिया। जिनके पास पहचान पत्र नहीं था, उन्हें वापस लौटना पड़ा।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए उठाया गया कदम
नेपाल के मोरंग जिले के मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) युवराज कटेल ने कहा कि नेपाल सरकार के निर्देश पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने साफ कहा कि अब सीमा पार करने वाले हर व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। नेपाल प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी खुद सीमा पर मौजूद रहकर पूरे अभियान की निगरानी करते दिखे।
दरअसल, इस सख्ती के पीछे हाल के दिनों में बढ़ी सुरक्षा चिंताएं मानी जा रही हैं। कुछ दिन पहले जोगबनी बॉर्डर से एक चीनी नागरिक के भारत में प्रवेश करने का मामला सामने आया था। बताया गया कि चीन के हुनान प्रांत का रहने वाला झोउ हुआन नेपाली नंबर की स्कूटी से भारत में दाखिल हुआ था। सीमा पर तैनात एसएसबी जवानों ने उसे रोक लिया। उसके पास वैध दस्तावेज नहीं मिलने पर स्थानीय पुलिस ने उससे गहन पूछताछ की।
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बिहार के सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट जारी
इस घटना के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। उत्तर बिहार के सीमावर्ती जिलों- बेतिया, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी और दरभंगा समेत कई इलाकों में पुलिस और एसएसबी को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सभी प्रमुख होटलों, लॉज और संदिग्ध ठिकानों की नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं।
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि खुली सीमा का फायदा उठाकर विदेशी नागरिक भारत में प्रवेश कर सकते हैं। भारत-नेपाल सीमा लंबे समय से दोनों देशों के नागरिकों के लिए सहज आवागमन का प्रतीक रही है। व्यापार, रोजगार, पर्यटन और पारिवारिक रिश्तों के कारण हर दिन हजारों लोग इस सीमा से गुजरते हैं। लेकिन बदले अंतरराष्ट्रीय हालात और सुरक्षा चुनौतियों ने अब इस खुली सीमा पर भी सख्ती बढ़ा दी है।
नई व्यवस्था ने यह साफ संकेत दे दिया है कि अब सीमा पार करना पहले जितना आसान नहीं रहेगा। नेपाल प्रशासन ने भी स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा के मुद्दे पर किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। ऐसे में नेपाल जाने वाले यात्रियों के लिए अब पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य हो गया है, वरना सीमा से लौटना तय माना जा रहा है।