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इंडेन गैस पर संकट, 50 हजार सिलेंडर अटके, ट्रांसपोर्टरों ने किया चक्का जाम

यूपी की राजधानी लखनऊ सरोजनीनगर इंडेन गैस बाटलिंग प्लांट में कम बिलिंग होने से नाराज ट्रांसपोर्टरों ने चक्का जाम कर प्रदर्शन किया। क्यों विवाद भड़का है, पढ़ें रिपोर्ट।

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इंडेन गैस बाटलिंग प्लांट के बाहर प्रदर्शन करते ट्रांसपोर्टर, Photo Credit : Social Media

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इंडियन ऑयल के LPG बॉटलिंग प्लांट में कम बिलिंग को लेकर परिवहनकर्ताओं का विरोध बढ़ गया है। सरोजनीनगर स्थित प्लांट के ट्रांसपोर्टरों ने काम रोककर चक्का जाम कर दिया, जिससे करीब 50 हजार सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि इंडियन ऑयल ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कानपुर और गोरखपुर के प्लांटों से सिलेंडर भेजने शुरू कर दिए हैं। कंपनी का दावा है कि आम उपभोक्ताओं को गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी।

सरोजनीनगर के अमौसी स्थित इंडेन बॉटलिंग प्लांट के ट्रांसपोर्टरों ने गुरुवार सुबह करीब 6 बजे से वाहनों का संचालन रोक दिया। परिवहनकर्ताओं का कहना है कि कम बिलिंग के कारण उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है। इससे वाहन की किस्त, चालक का वेतन, डीजल और दूसरे खर्च निकालना मुश्किल हो गया है।परिवहनकर्ताओं के मुताबिक प्लांट में करीब 132 वाहन लगे हैं। एक वाहन से लगभग 346 सिलेंडर भेजे जाते हैं। इस हिसाब से करीब 50 हजार सिलेंडर एजेंसियों तक नहीं पहुंच सके।

3 साल पहले के मुकाबले आधा काम मिलने का आरोप

ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि करीब तीन वर्ष पहले निविदा के दौरान प्रतिमाह लगभग 2.45 लाख रुपये का काम मिलने का भरोसा दिया गया था। वर्तमान में उन्हें करीब सवा लाख रुपये तक का ही काम मिल पा रहा है। कम बिलिंग के चलते परिवहन संचालन घाटे में पहुंच गया है। उनका यह भी आरोप है कि पहले लखनऊ के साथ आसपास के कई जिलों में सिलेंडरों की लोडिंग होती थी, लेकिन अब दूसरे जिलों की लोडिंग बंद कर दी गई है। तीन से चार दिन बाद एक लोडिंग मिलने से वाहनों की मासिक किस्त और दूसरे खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है।

 

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खाली सिलेंडर कराने में भी परेशानी

परिवहनकर्ताओं के मुताबिक खाली सिलेंडर कराने में भी परेशानी होती है। कई बार वाहन दो-दो दिन तक खाली नहीं हो पाते। इससे वाहन लंबे समय तक खड़े रहते हैं और ट्रांसपोर्टरों को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

कानपुर-गोरखपुर से भेजे गए सिलेंडर

आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य रखने के लिए इंडियन ऑयल ने वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की है। कानपुर और गोरखपुर स्थित प्लांटों से सिलेंडर भेजकर उन एजेंसियों की मांग पूरी करने की कोशिश की जा रही है, जो ट्रांसपोर्टरों के माध्यम से सरोजनीनगर प्लांट पर निर्भर हैं।इंडियन ऑयल के राज्य प्रमुख संजय भंडारी ने कहा कि ट्रांसपोर्टरों को गुरुवार दोपहर तीन बजे वार्ता के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे नहीं आए।

 

शुक्रवार को ट्रांसपोर्टरों को फिर बातचीत के लिए बुलाया गया है।उन्होंने बताया कि जिन वितरकों के पास अपनी गाड़ियां हैं, उनके वाहनों को प्लांट से सिलेंडरों की लोडिंग करा दी गई है। वहीं, जो एजेंसियां ट्रांसपोर्टरों पर निर्भर हैं, उन्हें उनकी मांग के मुताबिक कानपुर और गोरखपुर प्लांट से सिलेंडरों की आपूर्ति कराई जा रही है।संजय भंडारी ने स्पष्ट किया कि आम जनता को किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।

 

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लिखित आश्वासन पर अड़े ट्रांसपोर्टर

ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे सिलेंडरों की उठान शुरू नहीं करेंगे। उनका कहना है कि समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।फिलहाल इंडियन ऑयल की वैकल्पिक व्यवस्था और ट्रांसपोर्टरों के साथ प्रस्तावित वार्ता पर पूरे मामले की नजर है। बातचीत से समाधान नहीं निकला तो लखनऊ समेत आसपास के जिलों में एलपीजी आपूर्ति पर इसका असर और बढ़ सकता है।

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