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AAP से अलग होकर बनी इंद्रपस्थ विकास पार्टी का BJP में विलय क्यों हो रहा है?

लगभग एक साल पहले AAP से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले एक दर्जन से ज्यादा पार्षद अब बीजेपी में शामिल होने वाले हैं। कई पार्षदों को बड़ा पद भी मिल सकता है।

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मुकेश गोयल की अगुवाई में टूटे थे पार्षद, Photo Credit: Social Media

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दिल्ली नगर निगम (MCD) में आम आदमी पार्टी (AAP) को तब बड़ा झटका लगा था जब उसके 16 पार्षद अलग हो गए थे। इन पार्षदों ने इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (IVP) बनाई थी। मुकेश गोयल की अगुवाई में बनी इस पार्टी का विलय अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में होने जा रहा है। जाहिर है इसका फायदा दिल्ली बीजेपी को मिलेगा। अब चर्चा इस पर हो रही है कि आखिर यह विलय क्यों हो रहा है और यह उस वक्त क्यों नहीं हुआ जब ये पार्षद AAP से अलग हुए थे?


यह टूट मुकेश गोयल की अगुवाई में हुई थी। मुकेश गोयल एक समय पर अरविंद केजरीवाल के बहुत करीबी नेताओं में थे। उन्होंने AAP ने दिल्ली नगर निगम में नेता सदन बनाया था और 2025 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें टिकट दिया था। आदर्श नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़े मुकेश गोयल बीजेपी के राज कुमार भाटिया से हार गए थे। AAP में आने से पहले तक वह लंबे समय तक कांग्रेस में थे और इसी सीट पर दो बार कांग्रेस के टिकट पर भी चुनाव लड़े थे।

 

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क्यों हो रहा विलय?

अब दिल्ली नगर निगम में वार्ड कमेटियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन का चुनाव होना है। बीजेपी पिछली बार की तरह इस बार कोई गफलत नहीं चाहती है इसीलिए इस बार IVP का विलय करवाया जाना है। चर्चा है कि इनमें से मुकेश गोयल और हेमचंद्र गोयल को बीजेपी की ओर से उम्मीदवार भी बनाया जा सकता है। 

 

कुल 16 पार्षदों वाली इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी दिल्ली नगर निगम के लिए लिहाज से बेहद अहम है। इन 16 पार्षदों के बीजेपी में शामिल होने के साथ उसके पार्षदों की संख्या  139 हो जाएगी। 2022 में दिल्ली नगर निगम का चुनाव जीतने वाली AAP अब दिल्ली की सत्ता के साथ-साथ एमसीडी की सत्ता से भी बाहर हो चुकी है और बीजेपी का मेयर बन चुका है। कहा जा रहा है कि अगले चुनाव से पहले बीजेपी इन पार्षदों को अपने साथ लेना चाहती है और ये पार्षद भी IVP की तुलना में बड़ी पार्टी BJP के साथ रहना चाहते हैं ताकि चुनाव में आसानी हो।

 

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दूसरा पहलू यह है कि बीजेपी दिल्ली में किसी भी दूसरी पार्टी के साथ गठबंधन करके उसे जगह नहीं देना चाहती है। दिल्ली नगर निगम की समितियों के लिए हुए चुनाव में भी बीजेपी और IVP का गठबंधन हुआ था लेकिन कुछ सीटों पर आम आदमी पार्टी भारी पड़ गई थी। यही वजह है कि बीजेपी भी नहीं चाहती है कि ये पार्षद किसी दूसरी पार्टी के नाम पर चुनाव में उतरें। इन पार्षदों ने उस वक्त AAP का साथ छोड़ा था जब एमसीडी की स्थायी समितियों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए चुनाव होना था। 

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