पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक मोर्चा खोला हुआ है। इस बीच SIR के दौरान वोटर लिस्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बीरभूम जिले के नानूर विधानसभा में एक ही व्यक्ति को 389 मतदाताओं का पिता बताया गया है। ऐसे ही हावड़ा जिले के सांकराइल क्षेत्र में 310 मतदाताओं के साथ में एक ही अभिभावक का नाम लिखा पाया गया है।
इसके अलावा बंगाल में सात ऐसे मामले भी सामने आए जहां एक ही व्यक्ति के 100 से ज्यादा बच्चे हैं। इसमें मुर्शिदाबाद जिले में 199 मतदाताओं को एक ही माता-पिता से जोड़ा गया है। दार्जिलिंग जिले में 152, जलपाईगुड़ी के नागरकाटा में 120 और आसनसोल में 170 मतदाता एक ही व्यक्ति को अपना माता-पिता बताया है। यह गलती कैसे हुई है, जांच का विषय बनी हुई है।
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दो लाख के छह से ज्यादा बच्चे
रिकॉर्ड से मालूम हुआ है कि पश्चिम बंगाल में कुल 2.06 लाख से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एक मतदाता के छह से ज्यादा बच्चे दिखाए हैं। वहीं 8,682 लोगों के बच्चों की संख्या दस से भी ज्यादा है। यह डेटा SIR में गंभीर कमी को दर्शा रहा है। इस बीच चुनाव आयोग ने बुधवार को बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर कई बिंदुओं पर जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने उन्हें 9 फरवरी तक जवाब देने को कहा है।
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CM बनर्जी का SIR के खिलाफ अभियान
बता दें कि इन सब के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्षा ममता बनर्जी SIR के खिलाफ अभियान छेड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और बीजेपी, चुनाव आयोग के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल के वैध वोटरों को मृत घोषित करके उनका वोट काट रही है।
इतना ही नहीं सीएम ममता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग को चुनौती दी है। वह मुखर होकर SIR के खिलाफ केंद्र और बीजेपी को घेर रही हैं। ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में खुद SIR से जुड़ी याचिका पर अपने राज्य का पक्ष रखा है। वह कोर्ट में खुद बहस करने के लिए उतर गईं। देश के मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने उनकी दलीलें सुनीं।