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बिहारी युवाओं को एकजुट करने के लिए जन सुराज ने खोला मोर्चा, क्या है प्लानिंग?

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने युवाओं को एकजुट करने के लिए बिहार में कई चर्चित टेंडर घोटाले और बीपीएससी परीक्षा में अनियमितताओं को मोर्चा खोल दिया है।

Jan suraj Party

पार्टी संस्थापक प्रशांत किशोर।

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संजय सिंह, पटना। बिहार में चर्चित टेंडर घोटाले और बीपीएससी की एईडीओ परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जन सुराज पार्टी ने राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने रविवार को पटना स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि टेंडर घोटाला केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि सरकारी संस्थाओं की साख और जनता के पैसे से जुड़े विश्वास का सवाल है।

 

उन्होंने सवाल उठाया कि अप्रैल 2025 में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद इस मामले में बड़े स्तर पर कार्रवाई करने में लगभग एक साल की देरी क्यों हुई? हाल के दिनों में पूर्व आईएएस अधिकारी मुमुक्षु चौधरी, पूर्व मुख्य अभियंता तारणी दास, उमेश कुमार सिंह और कथित बिचौलिया रिशु श्री की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

 

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निष्पक्ष जांच होनी चाहिए- भारती

मनोज भारती ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में कथित हेरफेर, गोपनीय दस्तावेजों के दुरुपयोग, अधिकारियों के परिजनों की विदेश यात्राओं, अवैध संपत्तियों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि पूरे नेटवर्क के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान सार्वजनिक की जाए। जन सुराज ने इस मामले की न्यायिक निगरानी में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भी भेजा है।

जनता का पैसा और संस्थाओं की साख दांव पर

पार्टी के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार मुन्ना ने कहा कि यह मामला केवल घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता और जनता के विश्वास से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो शासन व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा।

बीपीएससी परीक्षा पर भी उठाए गंभीर सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी प्रवक्ता कुमार सौरभ ने बिहार लोक सेवा आयोग की एईडीओ परीक्षा को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2026 में राज्य के लगभग 700 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

कुमार सौरभ ने दावा किया कि जिस साईं एडूकेयर कंपनी को परीक्षा के बायोमेट्रिक सिस्टम और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी दी गई थी, उसे पहले गुजरात हाईकोर्ट की परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा भी इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

 

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किन अधिकारियों ने एक विवादित कंपनी को इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी? यदि कंपनी पर पहले से आरोप थे, तो उसके चयन की प्रक्रिया की जवाबदेही कौन तय करेगा?

 

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युवाओं का भरोसा कैसे लौटेगा?

कुमार सौरभ ने कहा कि आर्थिक अपराध इकाई द्वारा गिरफ्तार कुछ लोगों के कंपनी से जुड़े होने की चर्चा भी सामने आई है। ऐसे में यह आशंका और गहरी हो जाती है कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी तंत्र का दुरुपयोग हुआ हो सकता है। उन्होंने पूछा कि बीपीएससी अध्यक्ष और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी? परीक्षा से जुड़े टेंडर, तकनीकी व्यवस्थाओं और निगरानी प्रणाली में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच कब होगी? बिहार के लाखों प्रतियोगी छात्रों को यह भरोसा कैसे दिलाया जाएगा कि भविष्य में होने वाली परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होंगी?


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