JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच की एक महिला सदस्य ने रांची के कोतवाली थाने में पुलिस शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि 21 अगस्त को झारखंड सरकार के खिलाफ पुतला जलाने के प्रदर्शन के दौरान उन पर हमला हुआ, छेड़छाड़ की गई और गाली-गलौज की गई। यह प्रदर्शन झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहा था।
शिकायत दर्ज कराने में उनके साथ भारतीय जनता पार्टी के भी कुछ समर्थक थे। झारखंड विधानसभा के विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी, दीपक प्रकाश और अमर कुमार बाउरी भी इस दौरान साथ रहे। यह शिकायत रांची के कोतवाली पुलिस स्टेशन में कुमारी ने दर्ज कराई।
किन लोगों के खिलाफ दी गई है शिकायत?
नवीन चंचल, उत्तम यादव, शहबाज मलिक, मुस्तक आलम, आशुतोष वर्मा उर्फ सोनू वर्मा, अंकिता वर्मा, डॉ. हेमलाल कुमार मेहता और अश्विनी शर्मा।
शिकायतकर्ता:-
'मैं 21 अगस्त को सरकार के गुंडों द्वारा मेरे साथ किए गए दुर्व्यवहार के मामले में केस दर्ज कराने पुलिस स्टेशन गई थी। 26 दिनों के विरोध प्रदर्शन के बाद, सरकार ने अचानक हमें एक 'लॉलीपॉप' थमा दिया। सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा कर दी - लेकिन दो दिन बाद ही हमें पता चला कि कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है।'
शिकायत में पीड़ित पक्ष ने क्या कहा?
शिकायत में कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान पीड़िता के साथ मारपीट, छेड़छाड़, आपत्तिजनक व्यवहार, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस थाने पहुंचने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए पीड़िता ने बताया कि छात्र 26 दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार ने अचानक सभी परीक्षाएं रद्द करने का ऐलान किया, लेकिन दो दिन बाद पता चला कि अदालत ने रोक लगा दी है।
शिकायतकर्ता:-
'हमने सरकार के विरोध में
राहुल गांधी
और मुख्यमंत्री का पुतला जलाने की योजना बनाई थी और हम जुलूस में पुतले लेकर निकले थे। मैंने 40-50 लोगों का एक समूह देखा, जो छात्र नहीं बल्कि गुंडे निकले। वे आए और हमारे साथ शामिल हो गए, लेकिन अचानक उन्होंने पुतला छीनने की कोशिश की। इसे छीनते समय, उन्होंने मेरी गर्दन पर दो बार थप्पड़ मारा और मेरा स्कार्फ भी छीन लिया। इस दौरान, मेरे साथ बदसलूकी की गई। मेरे नाम और मेरी जाति को लेकर अपमानजनक बातें कहीं गईं। यह बेहद निंदनीय था।'
शिकायत में कहा गया है कि उन्होंने राहुल गांधी और मुख्यमंत्री के पुतले जलाने की घोषणा की थी। जुलूस में 40-50 लोग शामिल हो गए, जो छात्र नहीं बल्कि गुण्डे निकले। उन्होंने पुतला छीनने की कोशिश की। इस दौरान उन्हें गर्दन पर दो थप्पड़ मारे गए, उनका गमछा छीन लिया गया और नाम व जाति के आधार पर गालियां दी गईं। उन्होंने FIR दर्ज कराने का फैसला किया।
विपक्षी नेताओं ने क्यों दिया है साथ?
झारखंड बीजेपी के महासचिव अमर कुमार बाउरी ने कहा कि यह लोकतांत्रिक छात्र आंदोलन को दबाने की कोशिश थी। बाबूलाल मरांडी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं पर छात्रों पर हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा कि प्रदर्शन स्थल पर तैनात मजिस्ट्रेट और अधिकारियों ने हमलावरों के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की, बल्कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर एफआईआर नहीं दर्ज हुई तो BJP कार्यकर्ता मजिस्ट्रेट के दफ्तर घेरेंगे।
BJP ने क्या कहा?
BJP प्रवक्ता संदीप वर्मा ने इसे भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों से जोड़ा। उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के नोटिस से छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है। सरकार ने पहले गड़बड़ियां नकार दीं लेकिन आंदोलन तेज होने पर जांच का आदेश दिया। छात्रों को पीटा और धमकाया जा रहा है, इसके वीडियो भी सामने आए हैं।'
पुलिस ने क्या कदम उठाया है?
रांची पुलिस ने 21 अगस्त के पुतला जलाने वाले जुलूस में झड़प और बाधा के सिलसिले में तीन FIR दर्ज की हैं। इनमें 14 लोगों के नाम हैं और 200 से ज्यादा अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज है। रांची सिटी डीएसपी केवी रमन ने पहले कहा था कि प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की ओर से तय रूट का उल्लंघन किया, इसलिए पुलिस ने हल्के बल का इस्तेमाल किया।
कोर्ट ने क्या कदम उठाया है?
यह मामला झारखंड हाईकोर्ट में भी पहुंचा है। सरकार ने रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स परीक्षाएं रद्द की थीं। सुनवाई में अदालत ने कहा कि कोई नियुक्ति नहीं हुई है और राज्य सरकार को 24 सितंबर तक जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा। अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।