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जिन्ना के नाम पर जम्मू यूनिवर्सिटी में बवाल क्यों मचा? हंगामे की पूरी कहानी

मोहम्मद अली जिन्ना को भारत और पाकिस्तान विभाजन के लिए जिम्मेदार माना जाता है। भारत में उन्हें खलनायक के तौर पर देखा जाता है।

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जम्मू विश्वविद्यालय के बाहर नारेबाजी करते ABVP के छात्र। Photo Credit: PTI

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जम्मू विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के पोस्टग्रेजुएट कोर्स के नए पाठ्यक्रम पर हंगामा मचा है।  पाठ्यक्रम में पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना के राजनीतिक विचारों पर एक अध्याय शामिल किया है। नए पाठ्यक्रम के इस अध्याय पर हंगामा बरपा है। हिंदूवादी संगठनों का कहना है कि भारत विभाजन के लिए जिम्मेदार शख्स की तारीफ की जरूरत क्या है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने इस अध्याय को तुरंत हटाने की मांग की है। विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की है।

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क्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी?

ABVP के जम्मू-कश्मीर सचिव सन्नक श्रीवत्स ने कहा, 'जिन्ना और सर सैयद अहमद खान जैसे लोग दो-राष्ट्र सिद्धांत के समर्थक थे और भारत के विभाजन में उनकी भूमिका रही। ऐसे लोगों को पाठ्यक्रम में शामिल करना राष्ट्रीय भावनाओं के खिलाफ है।' ABVP ने चेतावनी दी है कि अगर चैप्टर नहीं हटाया गया तो पूरे जम्मू-कश्मीर में बड़ा आंदोलन चलाया जाएगा। 

 

 

विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या कहा है?

राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर बलजीत सिंह मान ने इसका बचाव किया है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से अकादमिक मामला है। जिन्ना को अन्य विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाता है। यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों के अनुसार है। 

प्रोफेसर बलजीत सिंह का कहना है कि पाठ्यक्रम का मकसद, छात्रों को अलग-अलग विचारों से रूबरू कराना है, जिससे वे खुद सही-गलत का फैसला कर सकें। यह किसी की वकालत नहीं, बल्कि पढ़ाई का हिस्सा है।

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अब आगे क्या?

विवाद बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति ने एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई है। इस समिति की अध्यक्षता भौतिकी विभाग के प्रोफेसर नरेश पाधा करेंगे। इसमें दर्शनशास्त्र, इतिहास और समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख शामिल होंगे। समिति में रणनीतिक और क्षेत्रीय अध्ययन विभाग के निदेशक भी शामिल हैं। सहायक रजिस्ट्रार इसके सदस्य-सचिव होंगे। समिति को जल्द से जल्द इस मुद्दे की पूरी जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
 

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जिन्ना का विरोध क्यों करते हैं हिंदू संगठन?

मोहम्मद अली जिन्ना को देश के विभाजन और हिंदू-मुसलमानों के लिए अलग-अलग राष्ट्र वाले सिद्धांत का सूत्रधार माना जाता है। भारतीयों का मानना है कि उनकी इस जिद ने सदियों पुरानी सांस्कृतिक एकता को तबाह कर दिया। साल 1946 में इस राह पर वह इस हद तक आगे बढ़ गए कि सीधी कार्रवाई की मांग पर उतर आए। जगह-जगह दंगे हुए। सैकड़ों लोग मारे गए।  

जिन्ना की जिद का लाभ अंग्रेजों ने उठाया, दो हिस्सों में भारत को बांट दिया। भारत, धार्मिक आधार पर बंट गया। करोड़ों लोग विस्थापित हुए, सीमा पर नफरत फैली और आज तक भारत भुगत रहा है। जिन्ना ने कश्मीर जैसे अनसुलझे विवादों की नींव भी रखी। एक तरफ जहां गांधी और नेहरू अखंड भारत के पक्षधर थे, वहीं जिन्ना को देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

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