कर्नाटक के हाई कोर्ट ने 84 साल के एक बुज़ुर्ग पिता का 2.4 एकड़ जमीन का गिफ्ट डीड रद्द कर दिया है। कोर्ट ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि बुज़ुर्ग ने अपनी जमीन अपनी दो बेटियों को गिफ्ट की थी, लेकिन उसके बाद बेटियों ने कथित तौर पर अपने बुढ़ापे में पिता की देखभाल नहीं की। पिता को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ा। इस मामले में कोर्ट ने पाया किबुजुर्ग के साथ न्याय नहीं हुआ। इसलिए कोर्ट ने गिफ्ट डीड को रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि बच्चे जब किसी बुजुर्ग माता-पिता को अपनी जमीन देते हैं तो उनके पास उस बुजुर्ग की रोजमर्रा की जरूरतों की देखभाल करने की जिम्मेदारी होती है। अगर वे इस जिम्मेदारी को पूरा नहीं करते हैं तो ऐसे मामलों में कोर्ट उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। कोर्ट बच्चों के नाम की गई जमीन को फिर से उनके बुजुर्ग माता-पिता के नाम कर सकता है।
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क्या है पूरा मामला?
कर्नाटक के टुमकुरु के रहने वाले 84 साल के एक बुजुर्ग ने उनकी करीब 2.4 एकड़ जमीन अपनी दो बेटियों के नाम गिफ्ट डीड के जरिये ट्रांस्फर की थी। जब बुजुर्ग ने अपनी जमीन ट्रांस्फर की थी तो उनकी बेटिंयों ने भरोसा जताया था कि वे अपने पिता के बुढ़ापे में उनकी देखभाल करेंगी। बेटियों ने उनके लिए खाना, छतस दवाइयां और हर रोज की जरूरतों को पूरा करने का वादा किया था लेकिन जमीन लेने के बाद बेटियों ने कथित तौर पर अपना वादा पूरा नहीं किया।
पिता का आरोप है कि जमीन मिलने के बाद उनकी बेटियां उन्हें नजरअंदाज करने लगी और उनकी जरूरतों का ध्यान नहीं रखा। समय के साथ जब उनकी हालत खराब हुई तो उनके पास कुछ नहीं बचा था। लास्ट में उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। बुज़ुर्ग ने कोर्ट में यह भी कहा कि वह गिफ्ट डीड तभी तैयार हुआ था जब बेटियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि वे उनकी देखभाल करेंगीं। कुछ समय बाद उन दोनों बेटियों ने अपने माता-पिता की देखभाल बंद कर दी और साथ में उन्हें जीवन जीने के लिए बुनियादी चीजें देने से भी इनकार कर दिया।
कोर्ट ने क्या कहा?
कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस सुराज गोविंदराज ने अपने आदेश में कहा कि बुज़ुर्ग व्यक्ति अक्सर लिखित शर्त वाले दस्तावेज के बारे में नहीं सोचते हैं। वे अपने बच्चों पर भरोसा करते हैं कि वे उनका ख्याल रखेंगे। ऐसे में जब कोई बच्चा इस भरोसे का दुरुपयोग करता है और माता-पिता की देखभाल नहीं करता तो इससे गिफ्ट डीड को रद्द किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बुज़ुर्ग ने गिफ्ट डीड को बिना किसी दबाव के नहीं, बल्कि भरोसे के साथ बनाया था।
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कोर्ट ने कहा कि बेटियों ने अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की और उन्होंने पिता को मदद नहीं दी, इसलिए कोर्ट ने गिफ्ट डीड मान्य नहीं है। कोर्ट ने गिफ्ट डीड को रद्द कर दिया। आदेश में कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बुज़ुर्ग का लिखित ज्ञान कम था क्योंकि वह अनपढ़ था और गिफ्ट डीड बेटियों ने ही तैयार कराई थी।
किस नियम के तहत दिया फैसला
कोर्ट ने 'Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007' का हवाला देते हुए कहा कि अगर कोई नागरिक अपनी जमीन या संपत्ति गिफ्ट करता है और इसे सौंपने की शर्त यह होती है कि बच्चे उसकी देखभाल करेंगे, तो बच्चे की यह जिम्मेदारी भी कानून के तहत आती है। अगर वे देखभाल नहीं करते हैं तो यह शर्त मान्य नहीं रहती और गिफ्ट डीड को रद्द किया जा सकता है।