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बाथरूम में था कपल और अंदर आ गया स्टाफ, लीला पैलेस होटल पर लगा 10 लाख का जुर्माना

होटल स्टाफ के मास्टर चाबी से बिना इजाजत के कमरे में घुसने को गंभीर लापरवाही मानते हुए कंज्यूमर कोर्ट ने उदयपुर के द लीला पैलेस होटल को सर्विस में कमी का दोषी ठहराया। साथ ही 10.65 लाख रुपये से अधिक मुआवजा व रिफंड देने का आदेश दिया।

Hotel Leela Palace, Udaipur

होटल लीला पैलेस, उदयपुर, Photo Credit- Social Media

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होटल में ठहरने वाले मेहमानों की सुरक्षा और उनकी निजता की पूरी जिम्मेदारी होटल की होती है लेकिन अगर बिना अनुमति कोई होटल स्टाफ कमरे में घुस जाए, तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाती है। ऐसा ही एक मामला राजस्थान के उदयपुर स्थित लग्जरी होटल द लीला पैलेस में सामने आया। यहां होटल स्टाफ ने मास्टर चाबी का इस्तेमाल कर सीधे मेहमानों के कमरे में अंदर चला गया। इस घटना की शिकायत के बाद चेन्नई की एक कंज्यूमर कोर्ट ने इसे सेवा में कमी मानते हुए होटल को 10.65 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा और रिफंड देने का आदेश दिया।

 

यह घटना 26 जनवरी 2025 को हुई थी। इस मामले में कंज्यूमर कोर्ट ने 16 दिसंबर को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि एक हाउसकीपिंग कर्मचारी ने मास्टर की का गलत इस्तेमाल करते हुए उस समय कमरे के अंदर आना जब शिकायतकर्ता बाथरूम में मौजूद थे, पूरी तरह से गलत है। इस घटना के कारण कपल को मानसिक पीड़ा और अपमान झेलना पड़ा।


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पूरा मामला

शिकायतकर्ता, जो चेन्नई की एक वकील हैं, जनवरी 2025 में अपने पति का जन्मदिन और बेबी-मून मनाने के लिए एक दिन के ठहराव हेतु लीला पैलेस उदयपुर में 55,500 रुपये में ‘ग्रैंड रूम विद लेक व्यू’ बुक किया था। यह बुकिंग नॉन-रिफंडेबल थी। जांच में सामने आया कि कमरे की बुकिंग के बावजूद हाउसकीपिंग स्टाफ घंटी बजाने के कुछ ही सेकंड बाद कमरे के अंदर आ गया। होटल ने इसे अपने इंटरनल SOP का हिस्सा बताया।

 

हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी इंटरनल SOP किसी मेहमान की निजता के मौलिक अधिकार से ऊपर नहीं हो सकता, खासकर तब जब वह पांच सितारा होटल में प्रीमियम शुल्क देकर ठहरा हो। कोर्ट ने यह भी माना कि एक मिनट से भी कम समय में मास्टर चाबी से कमरे में घुसना पूरी तरह गलत था।

शिकायतकर्ता के सबूत

कोर्ट ने शिकायतकर्ता के पेश किए गए सबूतों पर भरोसा जताया। इनमें होटल अधिकारियों के साथ हुई व्हाट्सएप चैट, होटल की ओर से जारी माफी पत्र और टूटे बाथरूम दरवाजे की तस्वीरें शामिल थीं। जांच में यह भी सामने आया कि कमरे के बाहर लगा CCTV कैमरा काम नहीं कर रहा था, जिससे होटल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता के सभी सबूत होटल के दावों को गलत साबित करते हैं। यह भी माना गया कि होटल ने जानबूझकर कपल को कई घंटों तक इंतजार करवाया और उनका सामान भी रोक लिया।

 

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कोर्ट का आदेश

कोर्ट को बताया गया कि एक दिन के कमरे का किराया करीब 55 हजार रुपये था। होटल को जिम्मेदार ठहराते हुए कंज्यूमर कमीशन ने 26 जनवरी 2025 से ब्याज सहित 55,500 रुपये का पूरा रूम टैरिफ लौटाने, मानसिक और गैर-आर्थिक नुकसान के लिए 10 लाख रुपये मुआवजा देने और मुकदमे के खर्च के तौर पर 10,000 रुपये का भुगतान दो महीने के भीतर करने का आदेश दिया।


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