महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा को जरूरी करने को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर बढ़ गया है। सरकार ने पहले आदेश जारी किए थे कि अगर ऑटो ड्राइवर मराठी नहीं बोलते तो उनका चलान काटा जाएगा लेकिन ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल की अतिरिक्त मोहलत दी गई है। सरकार के इस फैसले के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अमित ठाकरे ने ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई ड्राइवर यात्रियों के साथ बदतमीजी करता है या उनसे सिर्फ हिंदी में बात करने की जिद करता है, तो उनकी पार्टी ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
अमित ठाकरे ने कहा कि अगर उनके पास ऐसी शिकायत आती है कि कोई ऑटो ड्राइवर हिंदी में बात कर रहा है या यात्रियों के साथ गलत व्यवहार कर रहा है, तो वे उसे पीटेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रियों से यह नहीं कहा जाना चाहिए कि उन्हें हिंदी या उत्तर प्रदेश की भाषा में ही बात करनी होगी। अमित ठाकरे ने मराठी में बात करने पर जोर देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों को राज्य की भाषा समझनी चाहिए।
क्या है पूरा विवाद?
महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर विवाद तो लंबे समय से चल रहा है लेकिन ताजा मामला महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले से जुड़ा है, जिसके तहत ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप से चलने वाली कैब के ड्राइवरों के लिए मराठी की कामचलाऊ जानकारी जरूरी की गई थी। सरकार ने पहले ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया था। इसके बाद परिवहन विभाग ने नियम लागू करने की तैयारी शुरू कर दी थी। बिना मराठी की जरूरी जानकारी वाले ड्राइवरों के खिलाफ लाइसेंस या परमिट पर कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया था।
विरोध के बाद दिया समय
इस नियम को लेकर कई ड्राइवरों ने परेशानी जताई। ड्राइवर संगठनों का कहना था कि इस सेक्टर में अलग-अलग उम्र और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के लोग काम करते हैं। कई लोगों ने काफी पहले पढ़ाई छोड़ दी है, इसलिए कम समय में नई भाषा सीखना उनके लिए आसान नहीं है। इसी वजह से ड्राइवर संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर ज्यादा समय देने की मांग की थी। इसके बाद फडणवीस ने गुरुवार को एक साल की अतिरिक्त मोहलत देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इस एक साल के दौरान मराठी न आने पर ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।
MNS ने किया विरोध
सरकार के इस फैसले पर MNS के अमित ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल की मोहलत क्यों दी गई। उन्होंने इस फैसले को उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि चुनाव को ध्यान में रखकर सरकार ने यह कदम उठाया है। अमित ठाकरे ने कहा कि अगर इतनी ही मोहलत देनी है तो 10 या 15 साल की भी दे दीजिए।
कोर्ट पहुंचा मामला
मराठी भाषा के इस नियम को लेकर मामला अदालत तक भी पहुंच चुका है। चार कैब ड्राइवरों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सरकार के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि मराठी भाषा को जरूरी करने उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि मोटर व्हीकल एक्ट में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए किसी खास भाषा की जानकारी जरूरी होने की शर्त नहीं है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत अपने अधिकारों का भी हवाला दिया है।