बिहार में मढ़ौरा चीनी मिल को तरैया ले जाने की चर्चाओं के बीच चीनी मिल परिसर में संघर्ष समिति की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में मढ़ौरा और आसपास के दर्जनों गांवों से सैकड़ों किसान, मजदूर और आम लोग जुटे। बैठक में मौजूद सभी लोगों ने एक सुर में कहा कि मढ़ौरा चीनी मिल इलाके की पहचान और सालों पुरानी धरोहर है, इसे किसी भी हाल में मढ़ौरा से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। संघर्ष समिति के नेताओं ने साफ किया कि अगर सरकार तरैया में नई और अलग चीनी मिल बनाना चाहती है, तो उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
मढ़ौरा में पहले से चल रही चीनी मिल को यहां से हटाने की कोशिश किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक के दौरान माहौल गरमाया रहा और लोगों ने मढ़ौरा चीनी मिल जिंदाबाद के नारे भी लगाए। इसके साथ ही बैठक में आंदोलन को लेकर कई अहम फैसले लिए गए।
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गांव-गांव में चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
बैठक में आंदोलन को लेकर कई अहम फैसले लिए गए। समिति ने तय किया है कि अपनी मांगों को लेकर सबसे पहले मढ़ौरा अनुमंडल परिसर में शांतिपूर्ण तरीके से 1 दिन का धरना-प्रदर्शन करेंगे। धरना के बाद मढ़ौरा अनुमंडल पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर चीनी मिल को मरहौरा में ही बनाए रखने की मांग की जाएगी। साथ ही 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के दिन मढ़ौरा चीनी मिल परिसर में झंडा फहराने का भी फैसला लिया गया है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह सिर्फ एक मिल का मुद्दा नहीं है, बल्कि क्षेत्र के स्वाभिमान का सवाल है। इसलिए 15 अगस्त को मिल परिसर में तिरंगा फहराकर सरकार को संदेश दिया जाएगा कि जब तक मिल मढ़ौरा में है, तब तक क्षेत्र की पहचान भी यहीं रहेगी।
इसके अलावा, संघर्ष समिति ने आंदोलन को जनांदोलन बनाने के लिए गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाने की योजना भी बनाई है। इसके तहत छोटे-छोटे नुक्कड़ नाटकों के जरिए लोगों को मढ़ौरा चीनी मिल के इतिहास, महत्व और इसे बचाने की मुहिम के बारे में बताया जाएगा। समिति गांव-गांव में हस्ताक्षर अभियान भी चलाएगी और हर पंचायत स्तर पर टीम बनाई जाएगी। टीम का काम होगा कि अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ा जाए और सरकार तक जनता की आवाज पहुंचाई जाए। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि किसान और मजदूर इस मिल से सीधे जुड़े हैं। अगर मिल यहां से गई तो हजारों परिवारों की रोजी-रोटी छिन जाएगी। इसलिए इस लड़ाई को अंतिम सांस तक लड़ा जाएगा।
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जरूरत पड़ी तो करेंगे बड़ा आंदोलन
संघर्ष समिति ने साफ तौर पर कहा है कि उनका मकसद पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना है। अगर सरकार ने मढ़ौरा चीनी मिल को तरैया या किसी दूसरी जगह पर शिफ्ट करने की कोशिश की तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। बैठक में शामिल लोगों ने कहा कि मढ़ौरा चीनी मिल सिर्फ ईंट-पत्थर का कारखाना नहीं है, बल्कि यह मरहौरा क्षेत्र की पहचान और लोगों की भावनाओं से जुड़ी धरोहर है। इसे बचाने के लिए हर वर्ग को एकजुट होना होगा।