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'2 लाख के गद्दे बिछाए, 8 लोग बच गए', मालवीय नगर हादसे में यूं बचाई लोगों की जान

मालवीय नगर हादसे में 21 लोगों की जान चली गई लेकिन अगर स्थानीय लोगों ने मदद नहीं की होती तो मरने वालों की संख्या और भी ज्यादा हो सकती थी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार को लगी भीषण आग के दौरान कई स्थानीय लोग मददगार बनकर सामने आए। कुछ लोगों ने ईंट मारकर शीशे तोड़े, किसी ने रस्सी फेंककर लोगों को निकालने की कोशिश की तो किसी ने लाखों रुपये के रजाई-गद्दे जमीन पर बिछा दिए ताकि लोग उस पर कूद सकें। रजाई-गद्दों के चलते ही कम से कम 8 लोग सुरक्षित बच गए और उन्हें मामूली चोट ही आई। हादसे का शिकार हुए होटल के पास ही रजाई-गद्दे की दुकान चलाने वाले एक शख्स ने बताया कि उसने लगभग 2 लाख रुपये के गद्दे तुरंत वहां बिछाए और उन गद्दों पर कूदने के चलते कई लोगों की जान बची। इसके कई वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें देखा जा सकता है कि लोग जमीन पर बिछे गद्दों पर कूद रहे हैं।

 

इसी तरह आसपास के कुछ लोगों ने जब देखा कि अंदर फंसे लोग खिड़कियों के पास खड़े हैं लेकिन वे उसे तोड़ नहीं पा रहे हैं तो लोगों ने बाहर से ईंटें चलाईं। बगल के घरों से कुछ लोगों ने रस्सियां फेंकी ताकि लोग उन रस्सियों के सहारे बाहर निकल सकें। वहीं, कुछ अन्य लोगों ने आग बुझाने की भी कोशिश की। हालांकि, आग भीषण थी और अंदर इतना धुआं भरा था कि अंदर जाना मुश्किल था। इसके बावजूद लोगों ने हिम्मत दिखाकर लोगों को बचाने की कोशिश की और इस कोशिश में कई लोग जलते-जलते बचे।

 

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रजाई-गद्दों ने बचाई जान

होटल में आग लगने की सूचना मिलते ही रियाजुद्दीन मंसूरी अपने कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने होटल के बाहर जमीन पर दर्जनों रजाइयां और गद्दे बिछाकर एक अस्थायी सुरक्षा कवच तैयार किया। इससे इमारत में फंसे लोगों को कूदकर सुरक्षित बाहर निकलने में मदद मिली। रियाजुद्दीन ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले गद्दे और रजाइयां बिछाईं। उन्होंने दावा किया कि दमकलकर्मियों के पहुंचने से पहले ही आठ लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था। उन्होंने कहा कि बचाव कार्य के दौरान उन्हें और उनके बेटे को भी चोटें आईं।

 

रियाजुद्दीन के बेटे अरमान ने बताया, 'एक पड़ोसी से सुबह करीब साढ़े 8 बजे आग लगने की सूचना मिलने पर मैं मौके पर पहुंचा। ग्राउंड फ्लोर पर आग लगी हुई थी। कोई भी अंदर नहीं जा पा रहा था और बाहर नहीं आ पा रहा था। ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग चिल्ला रहे थे और पूछ रहे थे कि क्या वे कूद जाएं। इसके बाद मैंने तुरंत दुकान से करीब 20 से 25 रजाइयां और गद्दे निकालकर होटल के बाहर बिछा दिए।' करीब चार दशक से होटल के सामने गद्दों की दुकान चला रहे परिवार ने बताया कि लोगों को चोट से बचाने के लिए कई गद्दों और रजाइयों को एक-दूसरे के ऊपर रखा गया था।

 

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अरमान ने कहा, 'करीब आठ लोग उन पर कूदे और सुरक्षित बच गए। केवल कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं।' प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बिल्डिंग में धुआं भर जाने से अफरा-तफरी का माहौल था। उन्होंने कहा कि एक महिला अपने बच्चे को गोद में लेकर तीसरी मंजिल से कूद गई जबकि अन्य लोग बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे थे। ऐसे समय में गद्दे और रजाइयां कई लोगों के लिए सहारा बने। अरमान ने कहा कि अगर आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जाता तो उनकी दुकान भी इसकी चपेट में आ सकती थी। उन्होंने कहा, 'आपातकालीन सेवाएं शीघ्र मौके पर पहुंच गई थीं और बचाव अभियान में उन्होंने सहयोग किया। सभी समय पर पहुंचे और उन्होंने हमारी काफी मदद की।'

'गद्दे, रजाई, चादर सब दे दिए'

रियाजुद्दीन ने कहा, 'मुझे करीब दो लाख रुपये का नुकसान हुआ। हमने मृतकों और घायलों को बाहर निकालने के लिए चादरें भी दीं। रजाइयों के कवर भी दिए। हमारे पास जो भी सामान था, हमने मानवता के नाते सब दे दिया। हिंदू-मुसलमान से ऊपर इंसानियत है। हम सब हिंदुस्तानी हैं। जरूरतमंद लोगों की मदद करना मेरा फर्ज था।'

 

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बता दें कि मालवीय नगर के घनी आबादी वाले हौज रानी इलाके में स्थित ‘फ्लरिश स्टे’ होटल में लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार, घायल हुए 35 लोगों में से 19 का दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। अधिकारियों ने बताया कि यह होटल मुख्य रूप से पास स्थित मैक्स अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजन के ठहरने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

 

 

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