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बिहार की बेटियों पर मंत्री रेखा आर्या के पति ने ऐसा क्या कहा कि हंगामा मच गया?

उत्तराखंड के मंत्री के पति के बयान पर बिहार में सियासी हंगामा मचा है। विपक्षी दल बीजेपी को घेरने में जुटे हैं। अभी तक बीजेपी ने कोई बयान नहीं जारी किया है।

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प्रतीकात्मक फोटो। (AI generated image)

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संजय सिंह, पटना। उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू की बिहार की बेटियों पर की गई अभद्र टिप्पणी से पूरे राज्य में आक्रोश व्याप्त है। महिला संगठनों में भी उबाल है। विपक्ष के नेताओं ने बयान की निंदा की, मगर अभी तक बीजेपी के किसी बड़े नेता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। 

 

सहरसा से विधायक आईपी गुप्ता ने मंत्री के पति को बिहार लाने वाले को 10 लाख रुपये इनाम देने का बात कही। लोगों का गुस्सा लाजिमी है, लेकिन सवाल यह उठता है कि बिहार की बेटियों पर अभद्र टिप्पणी क्यों की जाती है? एक काला सच यह भी है कि गरीबी के कारण यहां की बेटियां दूसरे प्रदेशों में शादी के नाम पर बेच दी जाती है। पुलिस ने हर जिले में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल तो बनाया है, मगर यह सही तरह से काम नहीं करता है। 

राजद महिला प्रकोष्ठ का प्रदर्शन 

आरजेडी महिला प्रकोष्ठ ने घटना के विरोध में पटना में प्रदर्शन किया। महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका। महिलाओं का कहना है कि अगर इस मामले में कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती है तो आंदोलन को तेज किया जाएगा।

 

उधर, आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल का कहना है कि बिहार में महिलाओं का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित व्यक्ति पर कड़ी कानूनी कारवाई की जानी चाहिए। प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस घटना से बीजेपी नेताओं का चरित्र उजागर होता है। राजद नेताओं का कहना है कि कुछ दिन पहले मोतिहारी के विधायक प्रमोद कुमार ने भी महिलाओं पर अपमानजक टिप्पणी की थी। इस मामले में भी बीजेपी ने उक्त विधायक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। 

 

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पप्पू बोले- मंत्री के पति की जुबान काटनी चाहिए

पूर्णिया से कांग्रेस सांसद पप्पू यादव ने इस घटना के खिलाफ गंभीर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि बिहार की बेटियों के खिलाफ शर्मनाक बयान दे नेवालों की जुबान काट लेनी चाहिए। आज देश की राजनीति विपरीत दिशा में जा रही है। बाबा और नेता दोनों मिलकर देश को गुमराह कर रहे हैं। अब मुद्दे की राजनीति नहीं हो रही है। उन्होंने बीजेपी के चरित्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी नेताओं को इस मामले में आगे आकर बयान देना चाहिए। 

मानव तस्करी के कारण बिहार बदनाम

प्रदेश के पटना, गया, मुजफ्फरपुर, किशनगंज, अररिया, मधुबनी, कटिहार, पूर्णिया, सीतामढ़ी, बेगूसराय, सहरसा, मुंगेर, बेतिया और मोतिहारी में मानव तस्कर गिरोह सक्रिय हैं। तीन जिलों में राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुंवारे लड़के शादियों के लिए यहां के दलालों से संपर्क करते हैं। शादी के नाम पर वर पक्ष से मोटी रकम वसूली जाती है।

 

ब्याही गई लड़कियां दूल्हे के साथ एक बार जाने के बाद लौटकर नहीं आती हैं। कई बार यह भी मामला सामने आया है कि ब्याह के नाम पर ले जाई गई लड़कियों को देह व्यापार में धकेल दिया जाता है। हालांकि कुछ सामाजिक संगठनों की सक्रियता के कारण ऐसी घटनाओं में कमी आई है। कुछ दूल्हों और दलालों को पकड़ा भी गया है।

नहीं है पुलिस की सक्रियता 

मानव तस्करी को रोकने के लिए हर जिले में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल का गठन एक डीएसपी के नेतृत्व में किया गया, लेकिन यह सेल कारगर तरीके से काम नहीं कर रहा है। कैलाश सत्यार्थी की संस्था बचपन बचाओ आंदोलन से जुड़े सहरसा निवासी मास्टर घुरन महतो का कहना है कि पुलिस को इस मामले में और ज्यादा सक्रिय और संवेदनशील होना पड़ेगा। 

 

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उधर, मानव तस्करों के खिलाफ सीमांचल में मुहिम चला रहे राजेश कुमार सिंह का कहना है कि गरीबी और बेरोजगारी वाले इलाके मानव तस्करों के लिए ज्यादा सुरक्षित है। दहेज प्रथा के बढ़ते प्रभाव के कारण लोग अपने बेटियों के हाथ दलालों के चक्कर में पड़कर फर्जी दूल्हे को सौंप देते हैं। हालांकि अब लोगों में जागरुकता आई है। यही कारण है कि घटनाएं कुछ कम हुई है। पुलिस को और सक्रिय होने की जरूरत है।

 

 

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