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चिता की राख में नहाया, हड्डियां घर ले गया, अब जूतों की माला पहनाकर घुमाया गया

MP में एक शख्स और उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है क्योंकि यह आदमी एक चिता पर बची हुई राख में नहाया और अस्थियां अपने घर लेकर चला गया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI

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मध्य प्रदेश के दतिया में एक शख्स ने जलाई गई लाश की राख के साथ कुछ ऐसा किया, जिस पर किसी को भरोसा ही नहीं हो रहा था। 40 साल का यह शख्स अपने पड़ोसी के दाह संस्कार के बाद उसी की राख से नहाया और वहां पड़ी हड्डियां एक बैग में भरकर घर ले गया। बाद में जब इसका पता चला तो इस शख्स को खूब पीटा गया और उसके गले में चप्पल-जूतों की माला पहनाकर उसका जुलूस भी निकाला गया। अब पंचायत ने फैसला किया है कि इस शख्स और उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। पंचायत ने यह भी फैसला सुनाया है कि जो भी व्यक्ति इस परिवार से संपर्क करेगा, उस पर 5100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

 

रिपोर्ट के मुताबिक, झीर का बाग के निवासी मूलचंद कुशवाहा 72 साल के थे। लंबे समय से चल रही बीमारी के चलते 14 जनवरी को उनका निधन हो गया। उसी दिन पास के ही श्मशान घाट पर उनका दाह संस्कार किया गया। लाश जलाने के बाद मूलचंद के परिजन आगे की क्रिया के लिए घर लौट गए।

 

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पुलिस ने बताया है कि पड़ोस का ही बल्ली कुशवाहा नाम का एक शख्स भी उस दौरान श्मशान घाट पर मौजूद था। वह भी घर लौट गया था लेकिन रात के 11 बजे वह श्मशान घाट लौटा। आरोप है कि उसने पूरी चिता उधेड़कर रख दी। जलती लकड़ियां को उसने उलट-पलट दिया और जो राख मिली उसी से नहाया। इतना ही नहीं, बल्ली ने एक प्लास्टिक बैग में कुछ हड्डियां और खोपड़ी भर ली और उसे लेकर अपने घर चला गया। आरोप है कि ये सब अपने कमरे में रखकर वह रात में सोया। 

लोगों ने पीटा, नाली का पानी पिलाया और निकाला जुलूस

 

अगली सुबह जब मूलचंद का परिवार राख लेने लौटा तो देखा कि चिता खराब कर दी गई है और खोपड़ी गायब है। जब वहां पर एक शॉल मिली तो लोगों को शक हुआ कि यह सब बल्ली ने किया है। स्थानीय पार्षद कल्लू कुशवाहा को इसकी सूचना दी गई और बल्ली को उसके घर से बुलाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब बल्ली आया तो वह राख से नहाया हुआ था। जब उससे पूछताछ की गई तो उसने इसे मान भी लिया। इसके बाद पुलिस को बुलाया गया।

 

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मौके पर पहुंची पुलिस बल्ली के घर गई तो वहां एक प्लास्टिक बैग में अस्थियां, राख और खोपड़ी मिली। इस घटना के बाद स्थानीय लोग इकट्ठा हुए और बल्ली को जमकर पीटा। आरोप है कि उसे पीटने के बाद नाली का पानी पिलाया गया, मल खिलाया गाया और जूते-चप्पलों की माला पहनाकर उसका जुलूस निकाला गया। स्थानीय लोगों ने एक पंचायत करके बल्ली और उसके परिवार के सामाजिक बहिष्कार का भी फैसला सुना दिया। इसी पंचायत में फैसला सुनाया गया कि जो कोई भी बल्ली या उसके परिवार की मदद करके या उनसे बात भी करेगा उस पर 5100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। 

 

अब बल्ली के परिवार का कहना है कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। 20 साल पहले उसकी शादी हुई है लेकिन उसके कोई बच्चे नहीं हैं। उसकी दूसरी शादी से दो बच्चे हुए थे लेकिन वे मर गए और बीवी छोड़कर चली गई। परिवार का यह भी कहना है कि वह बहुत शराब पीता है और अंधविश्वास से जुड़ी हरकतें करता रहता है। बल्ली का कहना है कि एक बाबा ने उसे कहा था कि अगर बच्चे चाहिए तो चिता की राख में नहा लो।

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