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चुनाव जीतकर बदली पार्टी तो क्या होगा? मुकुल रॉय के उदाहरण से समझें नेता

कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुकुल रॉय को विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया है। वह बीजेपी से टीएमसी में शामिल हो गए थे।

Mukul Roy । Photo Credit: PTI

मुकुल रॉय । Photo Credit: PTI

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बिहार में विधानसभा चुनाव में वोटों की गिनती जारी है। हालांकि, एनडीए अभी आगे चल रही है लेकिन आमतौर पर चुनाव के बाद पूर्ण बहुमत न मिलने पर पार्टी बदलने की भी घटनाएं देखने को मिलती हैं। ऐसे में क्या हो सकता है इसको पश्चिम बंगाल में हुई मुकुल रॉय की घटना से समझ सकते हैं। 

 

दरअसल, कलकत्ता हाईकोर्ट ने आज वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय को विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया। यह फैसला दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल के आरोपों पर आधारित है। जस्टिस देबांग्सु बसाक और जस्टिस मोहम्मद शब्बर रशीदी की डिवीजन बेंच ने कहा कि मुकुल रॉय ने 2021 में बीजेपी के टिकट पर कृष्णानगर उत्तर सीट जीती थी, लेकिन चुनाव के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चले गए। यह दल-बदल कानून के तहत आता है, इसलिए उनकी सदस्यता तुरंत खत्म हो गई।

 

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स्पीकर ने किया था इनकार

अदालत ने विधानसभा स्पीकर के पुराने फैसले को भी रद्द कर दिया जिस पर स्पीकर ने अयोग्यता की याचिका पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में देरी करना संवैधानिक कर्तव्य का उल्लंघन है। मुकुल रॉय बीजेपी के बड़े नेता थे। 2021 चुनाव में उन्होंने कृष्णानगर उत्तर से जीत हासिल की, लेकिन जल्द ही टीएमसी में शामिल हो गए। इस पर बीजेपी के विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी और विधायक अंबिका रॉय ने अयोग्यता की याचिका दाखिल की थी।

ममता बनर्जी के करीबी

यह फैसला पश्चिम बंगाल की सियासत को प्रभावित करेगा। मुकुल रॉय की सीट अब खाली हो गई है, जिससे उपचुनाव की संभावना बन गई है। बीजेपी को उम्मीद है कि यह सीट वे जीत सकते हैं, जबकि टीएमसी इसे बचाने की कोशिश करेगी। मुकुल रॉय पहले टीएमसी में थे और ममता बनर्जी के करीबी माने जाते थे। 2017 में वे बीजेपी में गए, लेकिन 2021 में फिर टीएमसी में लौट आए।

दल-बदल कानून क्या है? 

दसवीं अनुसूची कहती है कि अगर कोई विधायक अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी में जाता है, तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है। इससे पार्टियां मजबूत रहती हैं और विधायक मनमानी नहीं कर सकते। कोर्ट ने स्पीकर की देरी पर सख्त टिप्पणी की। कहा कि स्पीकर को जल्दी फैसला करना चाहिए, वरना लोकतंत्र कमजोर होता है।

 

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बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, ‘यह जीत कानून की है। दल-बदल करने वालों को सजा मिलनी चाहिए।’ टीएमसी की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। मुकुल रॉय क्या करेंगे, यह देखना बाकी है। वे अपील कर सकते हैं।


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