महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के घाटकोपर इलाके में सामने आए नाबालिग बच्चियों से कथित यौन उत्पीड़न और पीड़ित परिवार के चार मेंबर्स को हिरासत में लेने का मामला लागातार तूल पकड़ते जा रहा है। इस घटना के बाद लोगों में काफी गुस्सा है। अब भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी नेता किरीट सोमैया और मुंबई की मेयर रितु तावड़े के नेतृत्व में घाटकोपर पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया गया। इन दोनों ने यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं और पीड़ित परिवार को रिहा करने की मांग की है।
बीजेपी नेता 25 अप्रैल की रात को दो मासूम बच्चियों के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस की जांच पर सवाल उठा रहे हैं। 25 अप्रैल को दो बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न की घटना सामने आई थी, जिसके बाद पुलिस ने शिकायत पर मामला दर्ज किया और एक आरोपी को हिरासत में भी ले लिया था। इस मामले में आरोपी पर कई गंभीर आरोप लग रहे हैं और नाबालिग बच्ची के साथ रेप की इस घटना में पोक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
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पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन क्यों?
बीजेपी नेता किरीट सौमैया का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने की कोशिश नहीं की। उनका आरोप है कि पुलिस पर जब परिवार ने दबाव बनाया तो पुलिस ने दोनों पीड़ित परिवारों को ही हिरासत में ले लिया। किरीट सौमैया का कहना है कि जब तक पुलिस पीड़ित परिवार को नहीं छोड़ती और इस मामले में दोषी पुलिस वालों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
परिवार को क्यों लिया हिरासत में?
इस मामले में पुलिस का कहना है कि पीड़ित परिवार ने गिरफ्तारी के दौरान पुलिस पर हमला किया। हालांकि, बीजेपी नेता और मेयर रितु तावड़े ने पुलिस के इस दावे को गलत बताया। उनका कहना है कि उन्होंने जो वीडियो देखा है, उसमें ऐसा कोई हमला नजर नहीं आ रहा है। रितु तावड़े का कहना है कि घर के सामने आरोपी ने बच्चियों के साथ रेप किया। पुलिस घटना के बाद वहां पहुंची और आरोपी को गिरफ्तार किया। परिवार गुस्से में है और यह स्वाभाविक है और पुलिस को इस गुस्से के बारे में अंदाजा होना चाहिए था लेकिन पुलिस ने परिवार के प्रति सहानुभूति दिखाने के बजाय उन्हें जेल में भेज दिया।
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अब क्या मांग कर रहे नेता?
किरीट सौमैया ने कहा, 'पीड़ित परिवार अभी भी जेल के अंदर बंद हैं। आज मैं खुद यहां धरने पर बैठा हूं और जब तक पीड़ित परिवार को बिना किसी शर्त के नहीं छोड़ा जाता और पुलिस वालों पर कार्रवाई नहीं होती तब तक हम यहां बैठे रहेंगे। उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।'