नगालैंड की राजधानी कोहिमा में नागा छात्र संगठन ने शनिवार एक रैली आयोजित की। इस रैली में वंदे मातरम को अनिवार्य करने का विरोध किया गया गया। 28 जनवरी को गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना के तहत शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रीय गीत गाना और बजाना अनिवार्य कर दिया गया है। नियम के खिलाफ नागा समुदाय ने विरोध व्यक्त किया है। 16 मार्च को विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
रैली में नागा समुदाय के लोगों ने कहा है कि वंदे मातरम गीत को अनिवार्य करके लोगों पर थोपा नहीं जा सकता है। बता दें कि यह रैली सुबह 10 बजे फूलबारी के ‘ओल्ड एमएलए हॉस्टल जंक्शन’ से शुरू की गई। जानकारी के लिए बता दें कि नगालैंड में ज्यादातर ईसाई धर्म के लोग रहते हैं, जो वंदे मातरम को धार्मिक अस्मिता से जोड़ रहे हैं।
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वंदे मातरम पर नागा छात्र संगठन ने क्या कहा?
नागा छात्र संगठन (एनएसएफ) ने कहा है कि नागा लोग सभी देशों के राष्ट्रीय गीतों और प्रतीकों का सम्मान करते हैं, लेकिन ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य रूप से लागू करना चिंता का विषय है। संगठन का कहना है कि इस गीत में धार्मिक और भक्तिपूर्ण प्रतीक शामिल हैं, जो राज्य में कई लोगों के विश्वास और अंतरात्मा के साथ विरोधाभास पैदा कर सकते हैं। उसने यह भी कहा कि नागा मातृभूमि ऐतिहासिक रूप से शांतिपूर्ण और अपनी अलग पहचान वाली भूमि रही है, जहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग आपसी सम्मान के साथ रहते आए हैं।
वंदे मातरम का विरोध क्यों?
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नागा समुदाय का कहना है कि शैक्षणिक संस्थान सीखने का स्थान होते हैं। स्कूल ऐसी जगह नहीं बनना चाहिए, जहां छात्रों और समुदायों की इच्छा के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रथाएं थोप दी जाएं। एनएसएफ ने नागा क्षेत्रों में अपनी सभी इकाइयों को निर्देश दिया है कि सभी लोग मिलकर अपने अधिकारों के लिए सोमवार को विरोध प्रदर्शन करेंगे।