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बिहार में आसान हुआ फैक्ट्री लगाना! एक ही जगह मिलेगा पूरा क्लीयरेंस

बिहार सरकार अब इन्वेस्टमेंट और इंडस्ट्री को आसान बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। इंडस्ट्री लगाने वाले इन्वेस्टर्स को अब अलग-अलग डिपार्टमेंट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

New Bihar Industrial Policy

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, Photo Credit: samrat4bjp/X

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बिहार सरकार ने राज्य को निवेश और उद्योग के लिए अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों को विभिन्न विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। राज्य मंत्रिपरिषद ने राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद सचिवालय को औद्योगिक निवेश से जुड़े मामलों के लिए एकल नोडल एजेंसी के रूप में मंजूरी दे दी है। इस फैसले को बिहार में औद्योगिक विकास की गति बढ़ाने और निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

अब तक निवेशकों को भूमि, पर्यावरण, बिजली, श्रम और अन्य आवश्यक अनुमतियों के लिए अलग-अलग विभागों से संपर्क करना पड़ता था, जिससे परियोजनाएं लंबे समय तक अटक जाती थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद AIPB सचिवालय निवेश संबंधी सभी प्रक्रियाओं का समन्वय करेगा और निवेशकों को एक ही मंच पर आवश्यक क्लीयरेंस उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा।

 

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लालफीताशाही पर लगेगी लगाम

सरकार का मानना है कि बहु-एजेंसी व्यवस्था के कारण पैदा होने वाली प्रशासनिक जटिलताएं और फाइलों की धीमी गति निवेशकों के लिए बड़ी चुनौती रही हैं। एकल नोडल एजेंसी बनने के बाद निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और जवाबदेह होगी। इससे परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

नई व्यवस्था के तहत विभिन्न विभागों से प्रतिनियुक्त अधिकारी औद्योगिक विकास आयुक्त के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण और पर्यवेक्षण में कार्य करेंगे। इससे विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और अनुमतियों के निर्गमन में अनावश्यक विलंब की संभावना कम होगी। आवश्यकता के अनुसार संबंधित विभागों और वैधानिक निकायों के नोडल अधिकारियों को इस प्रक्रिया में शामिल या अलग किया जा सकेगा।

 

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राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद निवेश मंजूरी की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करेगा। इससे निवेशकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे और अनुमतियों की प्रक्रिया अधिक सरल तथा पारदर्शी बनेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से राज्य में निवेश प्रस्तावों को तेजी से मंजूरी मिलेगी, जिससे नए उद्योग स्थापित होंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही बिहार की छवि एक निवेश-अनुकूल राज्य के रूप में मजबूत होगी।

बिहार को निवेश मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने की पहल

सरकार लंबे समय से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बेहतर बनाने और बड़े निवेशकों को आकर्षित करने की दिशा में कोशिश कर रही है। SIPB को एकल नोडल एजेंसी बनाने का निर्णय इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इससे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा तथा बिहार तेजी से उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सकेगा। कुल मिलाकर, यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि बिहार में निवेश, उद्योग और रोजगार के नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।


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