बिहार में रात की शिफ्ट में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक नया नियम तैयार किया गया है। श्रम संसाधन विभाग ने इस प्रस्ताव को बनाया है और वित्त विभाग ने इसे पास भी कर दिया है। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए बिहार कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। सरकार का मानना है कि आजकल दफ्तरों और कंपनियों में महिलाएं ज्यादा काम कर रही हैं इसलिए उनके लिए सुरक्षित और अच्छा माहौल होना बहुत जरूरी है। इसी वजह से इस नए नियम में कई जरूरी बातें शामिल की गई हैं।
नए नियमों के मुताबिक शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे के बीच किसी भी महिला से काम कराने के लिए उनकी लिखित मंजूरी लेना जरूरी होगा। अगर कोई महिला कर्मचारी रात में काम नहीं करना चाहती तो कंपनी उन पर दबाव नहीं डाल सकती। रात की शिफ्ट में कम से कम दो महिला कर्मचारियों का एक साथ होना जरूरी होगा किसी भी महिला को रात में अकेले ड्यूटी पर नहीं रखा जाएगा। इसके अलावा, दफ्तर के अंदर और आस-पास उजाले का पूरा इंतजाम करना होगा। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी होगा और उसकी रिकॉर्डिंग को कम से कम 45 दिनों तक संभालकर रखना होगा ताकि जरूरत पड़ने पर जांच की जा सके।
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महिलाओं को मिलने वाली राहत
महिला कर्मचारियों की सेहत का ध्यान रखते हुए गर्भवती महिलाओं को नाइट शिफ्ट से पूरी छूट दी गई है उनसे रात में काम नहीं लिया जाएगा। रात में काम करने वाली महिलाओं को घर से दफ्तर लाने और वापस घर छोड़ने की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। कंपनियों को अपने खर्च पर गाड़ियां चलानी होंगी और इन गाड़ियों में सीसीटीवी कैमरे भी लगे होने चाहिए। इसके साथ ही कंपनियों को महिलाओं के लिए अलग और साफ टॉयलेट, पीने का साफ पानी, वॉशरूम और कपड़े बदलने के लिए सुरक्षित चेंजिंग रूम का इंतजाम करना होगा।
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कैबिनेट की मंजूरी
सरकार ने साफ कहा है कि जोखिम भरे और खतरे वाले कामों में महिलाओं को लगाने के लिए अलग से और ज्यादा सख्त नियम बनाए जाएंगे। महिलाओं को मिलने वाली सैलरी, छुट्टियां और बाकी सभी फायदे श्रम कानूनों के हिसाब से ही दिए जाएंगे। अभी यह प्रस्ताव बिहार कैबिनेट की मंजूरी के लिए रुका हुआ है। वहां से पास होते ही राज्य की सभी कंपनियों, फैक्ट्रियों और प्राइवेट संस्थानों को इन नियमों को मानना ही होगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे महिलाएं ज्यादा सुरक्षित होंगी और उन्हें नौकरी के नए मौके भी मिलेंगे।