पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में तीस्ता नदी में हाथी का एक बच्चा डूब गया था। स्थानीय मछुआरों ने जब उसे देखा, तो बहादुरी दिखाते हुए हाथी के बच्चे को बचाने के लिए नाव के जरिए नदी में गए। इसके बाद हाथी के नवजात बच्चे को नाव में बैठाकर वापस ले आए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसे देखकर लोगों ने मछुआरों की तारीफ की है। वन विभाग की जानकारी के मुताबिक, हाथी के बच्चे का जन्म 4 दिन पहले ही हुआ था।
वन विभाग के अनुसार, यह घटना शुक्रवार को हुई थी। सुबह करीब 8 बजकर 30 मिनट पर हाथियों का एक झुंड तीस्ता नदी को पार करने की कोशिश कर रहा था। तभी हाथी का एक बच्चा अपनी मां से बिछड़ गया और नदी के तेज बहाव में बह गया। हाथी का बच्चा तीस्ता बैराज से लगभग 4 किलोमीटर दूर तक बह चुका था, जिसके बाद मछुआरों ने मिलकर उसकी जान बचाई।
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लोगों ने बचाई नन्हे हाथी की जान
पश्चिम बंगाल फिशरमेन फोरम के पांच लोग मछली पकड़ रहे थे। इस दौरान पांचों लोगों ने देखा कि एक हाथी का बच्चा नदी में बह रहा है। तभी मछुआरों ने अपनी नाव आगे बढ़ाई और डूबते हुए बच्चे को बचा लिया। जानकारी के मुताबिक, मछुआरों के नाम मिठू दास, राजेश दास, गोपाल दास, विश्वनाथ दास और अन्य एक साथी हैं। इन लोगों ने सराहनीय काम किया।
वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि गोपाल दास और मिठू दास ने नाव चलाई। उन्होंने लगभग 4 किलोमीटर तक हाथी के बच्चे का पीछा किया। हाथी के बच्चे के पास पहुंचकर उसे नाव में खींच लिया। इस दौरान बबलू दास, कादर दास और गोपाल ने भी मदद की। मछुआरों की बहादुरी को देखने के बाद बैकुंठपुर के DFO मुदित ने मछुआरों की तारीफ की थी।
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वन विभाग ने मां से मिलाया बच्चा
पिछले सोमवार को हाथियों का एक झुंड गाजलडोबा तीस्ता बैराज की ओर बढ़ रहा था। तभी नन्हा हाथी नदी में बह गया था। जब हाथी के बच्चे को बचा लिया गया, तब वन विभाग ने उसकी मां की तलाश शुरू की। इसके बाद नन्हे हाथी को उसकी मां से मिलवा दिया गया।