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मंत्री बनते ही अधिकारियों को दे दिया सरप्राइज, एक्शन मोड में आए निशांत कुमार

बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार मंत्री बनते ही एक्शन मोड में नडर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता गांव और शहर में एक जैसा इलाज देने की है।

nishant kumar and nitish kumar

नीतीश कुमार और निशांत कुमार, File Photo Credit: PTI

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संजय सिंह, पटना, बिहार की राजनीति में अब एक नए अध्याय की शुरुआत हो चुकी है। पिछले कुछ महीनों में बिहार से नीतीश कुमार की विदाई और अब उनके बेटे का कैबिनेट मंत्री बनना बड़े राजनीतिक बदलाव के संकते हैं। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब रानजीति में भी हैं और मंत्री भी बन गए हैं। नई भूमिका संभालने के बाद स्वास्थ्य मंत्री बने निशांत कुमार ने अपने शुरुआती कदमों से ही यह संकेत दे दिया है कि वह स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर केवल औपचारिक राजनीति नहीं, बल्कि जमीनी बदलाव का संदेश देना चाहते हैं। 

 

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री का पदभार ग्रहण करने के दूसरे ही दिन उनका अचानक सचिवालय स्थित स्वास्थ्य विभाग पहुंच जाना राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमे तक चर्चा का विषय बन गया। उनके अचानक पहुंचने की सूचना मिलते ही कई अधिकारी भी तत्काल दफ्तर पहुंचे और विभागीय गतिविधियां तेज हो गईं।

 

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अधिकारियों के साथ की लंबी बैठक 

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ लंबी बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में निशांत कुमार ने जो बातें कहीं, उसने आम लोगों के बीच उम्मीद की नई चर्चा छेड़ दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी प्राथमिकता गांव और शहर के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं की खाई को कम करना है। उन्होंने कहा कि बिहार का गरीब मरीज भी वही इलाज पाए, जो बड़े शहरों और संपन्न लोगों को मिलता है। स्वास्थ्य सेवा किसी वर्ग विशेष की सुविधा नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है।

क्या संदेश दिया?

निशांत कुमार ने कहा कि वह ऐसी व्यवस्था बनाने की दिशा में काम करेंगे, जहां गरीब और अमीर के बीच इलाज को लेकर कोई भेदभाव न हो। उनका कहना था कि ग्रामीण इलाकों के लोगों को छोटी बीमारी के लिए भी बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ती हैं। इस स्थिति को बदलना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे।

 

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए विभागीय योजनाओं, अस्पतालों की व्यवस्था, दवा उपलब्धता और चिकित्सकीय सुविधाओं की समीक्षा लगातार की जाएगी। उन्होंने कहा कि केवल योजनाओं की घोषणा से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसका असर आम मरीज तक दिखना चाहिए।

निशांत कुमार ने क्या कहा?

एक दिन पहले पदभार ग्रहण करने के दौरान भी निशांत कुमार ने विकास और स्वास्थ्य सुधार को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि उनके पिता और मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने सात निश्चय और समृद्धि यात्रा के दौरान जनता से जो वादे किए थे, उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। 

 

निशांत कुमार ने कहा, 'राज्य में पिछले दो दशकों में जो विकास कार्य हुए हैं, उन्हें और मजबूती देने की दिशा में काम होगा।' स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया कि राज्य की स्वास्थ्य योजनाओं और व्यवस्थाओं को गहराई से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र बेहद संवेदनशील विभाग है और यहां लिए गए फैसलों का सीधा असर करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है। इसलिए किसी भी निर्णय में संवेदना और पारदर्शिता दोनों जरूरी हैं।

 

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किन मुद्दों पर की चर्चा?

सूत्रों के अनुसार, विभागीय बैठक में अस्पतालों की स्थिति, डॉक्टरों की उपलब्धता, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली, दवा आपूर्ति और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। अधिकारियों को स्पष्ट संकेत दिया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आम लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

 

निशांत कुमार के बयानों और सक्रियता को लेकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोग इसे बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में नई उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसे उनकी कार्यशैली की शुरुआती झलक मान रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि उनके वादे जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से उतर पाते हैं।


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