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नीतीश कुमार बनेंगे जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष, निशांत के लिए क्या है प्लान?

बिहार की राजनीति में नया मोड़ आने वाला है। इस बात की पूरी संभावना जतायी जा रही है कि आगामी 24 मार्च को नीतीश कुमार अध्यक्ष पद की शपथ ले सकते हैं।

Nitish kumar

नीतीश कुमार । Photo Credit: PTI

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संजय सिंह, पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आकार लेता दिख रहा है। नीतीश कुमार एक बार फिर पार्टी संगठन की कमान संभालने जा रहे हैं। जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर लगभग तय माना जा रहा है कि 24 मार्च को उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया जाएगा।


पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने साफ संकेत दिए हैं कि यह सिर्फ औपचारिकता भर रह गई है। नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगर कोई दूसरा उम्मीदवार सामने नहीं आता, तो नीतीश कुमार निर्विरोध अध्यक्ष बन जाएंगे।

 

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राष्ट्रीय राजनीति पर फोकस

राज्यसभा सांसद बनने के बाद नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। ऐसे में पार्टी की कमान उनके हाथ में आना इस रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। संजय झा का कहना है कि नीतीश कुमार संगठन और सरकार दोनों को दिशा देने का काम करेंगे।

नेक्स्ट जनरेशन की एंट्री

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा निशांत कुमार को लेकर है। हाल ही में पार्टी में सक्रिय हुए निशांत को लेकर जेडीयू नेताओं का रुख अब खुलकर सामने आ रहा है। संजय झा ने संकेत दिया है कि निशांत को जल्द ही सरकार और संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। पार्टी के अंदर उन्हें अगली पीढ़ी का चेहरा माना जा रहा है। युवा कार्यकर्ताओं के बीच उनकी बढ़ती लोकप्रियता भी इस दिशा में एक बड़ा संकेत है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले समय में वह मंत्री या यहां तक कि उपमुख्यमंत्री की भूमिका में भी दिख सकते हैं।

क्या बदलेगा समीकरण?

अगर नीतीश कुमार पूरी तरह राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होते हैं, तो बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना भी बन सकती है। ऐसे में नई सरकार के गठन और सत्ता संतुलन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम दोहरी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। केंद्र की राजनीति में मजबूत पकड़ और राज्य में नई नेतृत्व टीम तैयार करना।

 

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24 मार्च पर टिकी नजरें

अब सबकी नजर 24 मार्च पर है, जब आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है। जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच इसे लेकर उत्साह साफ दिख रहा है। बिहार की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक ट्रांजिशन की शुरुआत भी माना जा रहा है। जहां अनुभव और नई पीढ़ी साथ-साथ आगे बढ़ते नजर आएंगे।


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