नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने 6 जनवरी को जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को दी गई अनुमति वापस ले ली। यह अनुमति एकेडमिक ईयर 2025-26 में 50 सीटों के साथ MBBS कोर्स शुरू करने के लिए दी गई थी। कमीशन के अनुसार, कॉलेज से जुड़ी कई गंभीर शिकायतें सामने आई थीं, जिनकी जांच के बाद उन्हें सही पाया गया। इसी आधार पर यह फैसला लिया गया। यह फैसला मेडिकल कॉलेज के MBBS कोर्स के पहले बैच में कुल 50 में से 46 मुस्लिम छात्रों के दाखिले को लेकर हाल में हुए विवाद के बीच लिया गया है।
MARB ने इससे पहले 5 दिसंबर और 19 दिसंबर 2024 को सार्वजनिक नोटिस जारी कर एकेडमिक ईयर 2025-26 के लिए नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए आवेदन मांगे थे। इसी प्रक्रिया के तहत कॉलेज ने भी आवेदन किया था, जिसे अब खारिज कर दिया गया है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
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नोटिस में क्या था?
NMC की जारी एक पत्र में कहा गया, 'पब्लिक नोटिस के बाद NMC को कई अन्य एप्लीकेशन के साथ-साथ एक नए मेडिकल कॉलेज श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की स्थापना के लिए एक आवेदन मिला। दस्तावेजों की जांच और विशेषज्ञ मूल्यांकन के बाद फिजिकल इंस्पेक्शन सहित उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद, MARB ने कॉलेज को LoP प्रदान किया। उसके बाद मेडिकल संस्थान ने एडमिशन किए।'
इसमें आगे कहा गया, 'पिछले दो हफ्तों में NMC को संस्थान के खिलाफ कई गंभीर आरोपों वाली शिकायतें मिली। जिनमें सबसे जरूरी अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लिनिकल सामग्री, फुल-टाइम टीचिंग फैकल्टी की कमी और रेजिडेंट डॉक्टरों की अपर्याप्त संख्या शामिल है।'
सरप्राइज विजिट
MARB ने शिकायत मिलने के बाद जांच के लिए एक सरप्राइज फिजिकल इंस्पेक्शन करने का फैसला किया। टीम की मूल्यांकन रिपोर्ट के बाद यह साबित हुआ कि शिकायतें सही थी। इसमें कहा गया कि देखी गई कमियां गंभीर और बड़ी थी।
अब सवाल उठता है कि जिन छात्रों ने पहले ही एडमिशन ले लिया है उनका क्या होगा। इस सिलसिले में काउंसिल ने कहा, 'ऐसे हालात में संस्थान का चलते रहना मेडिकल शिक्षा की क्वालिटी को गंभीर रूप से खतरे में डाल देता और छात्रों के एकेडमिक हितों पर बुरा असर डालता। एकेडमिक सेशन 2025-2026 के लिए पहले से एडमिशन ले चुके छात्रों के हितों की रक्षा के लिए तय नियमों के अनुसार अतिरिक्त सीटों के रूप में, जम्मू के भीतर अन्य मेडिकल संस्थानों में एडजस्ट करने के लिए अधिकृत किया गया है।'
हालिया राजनीतिक विवाद
इस मेडिकल कॉलेज में MBBS कोर्स के पहले बैच में कुल 50 छात्रों में से 46 मुस्लिम छात्रों ने एडमिशन लिया था जिसको लेकर विवाद हुआ था। कई स्थानीय और हिंदू संगठनों ने हिंदू उम्मीदवारों के लिए आरक्षण की मांग की थी। इन संगठनों का कहना था कि यह कॉलेज हिंदू भक्तों के दान से बनाया और बड़े पैमाने पर उसी से चलाया जा रहा था।
विवाद पर उमर अब्दुल्ला का बयान
इन विवादों के बीच जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी सरकार से छात्रों को दूसरे मेडिकल कॉलेजों में एडजस्ट करने और विवाद को खत्म करने के लिए नए खुले मेडिकल कॉलेज को बंद करने के लिए कहा था। उमर ने बीजेपी पर शिक्षा, खेल और खाने की आदतों पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाया।
उमर ने कहा, 'बच्चों ने इस परीक्षा को पास कर अपनी कड़ी मेहनत से सीटें हासिल कीं। किसी ने भी उन पर कोई एहसान नहीं किया। अगर आप उन्हें वहां नहीं चाहते हैं तो उन्हें कहीं और एडजस्ट करें।'
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उन्होंने आगे कहा, 'इन हालातों में, मुझे नहीं लगता कि छात्र खुद वहां पढ़ना चाहेंगे। हम भारत सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय से इन बच्चों को दूसरे कॉलेजों में एडजस्ट करने का अनुरोध करते हैं। अगर मैं इन छात्रों का माता-पिता होता तो उन्हें वहां नहीं भेजता। हम नहीं चाहेंगे कि वे ऐसी जगह पढ़ें जहां इतनी राजनीति हो।'
उन्होंने जोर देकर कहा, 'हमारे बच्चों को दूसरा मेडिकल कॉलेज दें और कॉलेज (वैष्णो देवी) को बंद कर दें। हमें ऐसे संस्थान की जरूरत नहीं है। इन बच्चों को अच्छे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडजस्ट करें।'